देवगढ़/राजसमंद। देवगढ़ थाना क्षेत्र में एक गंभीर सामाजिक विवाद सामने आया है, जिसमें 72 खेड़ा रेगर समाज के पाँच पटेलों द्वारा सेवानिवृत्त बुजुर्ग कन्हैया लाल रेगर और उनके परिवार को अवैध रूप से समाज से बहिष्कृत कर दिया गया। पीड़िता लीला कुमारी की शिकायत के अनुसार, समाज के पदाधिकारियों ने बिना किसी कानूनी अधिकार के फतवा जारी कर पूरे परिवार पर सामाजिक प्रतिबंध लगा दिया।

कन्हैया लाल रेगर, जो एसबीआई बैंक से सेवा निवृत्ति के बाद अपने परिवार के साथ शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे थे, अब समाज के लोगों से मिलने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। परिवार का दावा है कि उनका एकमात्र “दोष” उनकी बेटी के विवाह को लेकर उत्पन्न विवाद था, जिसका मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है। इसी विवाद को आधार बनाकर समाज के पाँच पटेलों ने बैठक में परिवार को समाज से अलग करने का फरमान सुना दिया।


आरोप है कि समाज के अध्यक्ष धर्म चंद्र ने भवन निर्माण की बैठक के बहाने बुलाई गई सभा में पीड़िता का मामला उठाया और बिना किसी तथ्य-जांच या सुनवाई के सामाजिक बहिष्कार का निर्णय लिया। इसके बाद से परिवार को समाज में आने-जाने, रिश्तेदारी निभाने, समारोहों में भाग लेने और सामान्य सामाजिक संपर्क से वंचित कर दिया गया।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने और संबंधित लोगों को नोटिस भेजे जाने के बावजूद उनका स्त्रीधन—नेकलेस, मंगलसूत्र, पाजेब सहित अन्य जेवर और दहेज का सामान—अब तक वापस नहीं किया गया। उनका कहना है कि प्रशासन की धीमी कार्रवाई ने समाज पदाधिकारियों का मनोबल बढ़ा दिया है।

साथ ही, समाज के पाँच पटेलों ने कन्हैया लाल के दामाद को भी समाज से बाहर कर दिया है। दामाद के घर में बेटियों की शादी तय होने के कारण उसे और उसके परिवार को भारी सामाजिक अपमान और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इस मामले में पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और पुलिस से अवैध फतवा जारी करने वाले समाज पदाधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने और परिवार से किया गया सामाजिक बहिष्कार समाप्त कराने की अपील की है। वहीं, 72 खेड़ा के अध्यक्ष ने कहा कि “जिसकी मर्जी हो वह बुलाए और जिसकी मर्जी हो वह नहीं जाए।”

यह मामला इस बात की गंभीर याद दिलाता है कि पारंपरिक सामाजिक शक्तियों का दुरुपयोग किस तरह से व्यक्तियों के जीवन पर असर डाल सकता है और प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता को उजागर करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण है कि कानूनी प्रक्रिया इस बुजुर्ग परिवार को न्याय दिला पाएगी या नहीं।

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Pratahkal Bureau

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