खमनोर । हल्दीघाटी विकास की आड़ में हल्दीघाटी के मूल स्थलों के साथ छेड़छाड़ व पहचान बदलने के नाजायज प्रयास रोकने संबंध बाबत यह ज्ञापन सौंपा गया।

स्मारकों की उपेक्षा और पहचान का संकट

हल्दीघाटी के विकास के नाम पर विगत दशकों में रक्ततलाई स्थित भोले शय्यद और सेनापति जैसे देशभक्त शहीदों के स्मारकों को धर्मविशेष की के रूप में प्रचारित कर सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही सफेदपोश पर्यटन माफियाओं द्वारा सरकार की योजना को स्मृति संस्थान की आड़ में विकृत कर मूल हल्दीघाटी युद्ध स्थल रक्ततलाई व दर्रे सहित स्मारक को लगातार उपेक्षित रखा गया है।

"वर्तमान में प्रताप के जीवन से जुड़े स्थलों के विकास हेतु सरकार ने 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। कि पुरखों के स्मारकों का विकास होना आवश्यक है लेकिन मूल पहचान को बचाना अतिआवश्यक है।"

हल्दीघाटी का ऐतिहासिक प्रशासनिक व निर्माण घटनाक्रम

आपकी जानकारी बाबत लेख है कि पहले हल्दीघाटी खमनोर में जिला स्थापित होकर 60 गावों का प्रशासनिक नेतृत्व रहा था।

  • सन 1967: खमनोर से हल्दीघाटी तक सड़क का निर्माण राष्ट्रपति स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद द्वारा निजी कोष से कराया गया था।
  • पंचायत समिति गठन: पंचायत समिति बनने पर चेतक स्मारक पर परकोटा बनवाया गया था।
  • 1976 (मेवाड़ कॉम्प्लेक्स): स्वर्गीय इंदिरा गांधी तत्कालीन प्रधानमंत्री ने हल्दीघाटी युद्ध की 400वीं तिथि पर मेवाड़ कॉम्प्लेक्स की घोषणा की थी।

इस दौरान चेतक गेस्ट हाऊस का निर्माण कराया गया था। शाहीबाग में सभास्थल बनाते हुए मूल हल्दीघाटी दर्रे पर स्मारक हेतु कुछ कार्य भी आरम्भ हुए लेकिन स्थानीय उपेक्षापूर्ण रवैये के चलते मूल योजना में प्रस्तावित कार्य बंद हो गए, जिसके प्रमाण आज भी मौजूद है।

राष्ट्रीय स्मारक और विकास कार्यों में बाधाएं

1984 तक घोषणा धरातल पर लागू नहीं होने पर स्थानीय जय हल्दीघाटी नवयुवक मंडल के द्वारा पत्राचार सहित अन्य प्रयासों से सरकार ने 1993 में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित महाराणा स्मृति संस्थान संस्थान के माध्यम से विकास कार्य आरंभ किया।

  • 1997 (शिलान्यास): स्वर्गीय श्री भेरूसिंह शेखावत पूर्व मुख्यमंत्री की अगुवाई में सरकार ने महाराणा प्रताप राष्ट्रीय स्मारक की नींव महाराणा प्रताप स्मृति संस्थान को आवंटित भूमि पर रखी गई थी।
  • मुख्य अतिथि: शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल व पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी द्वारा किया गया।

ये कार्य भी स्मृति संस्थान के तत्कालीन महासचिव एवं आरटीडीसी के तत्कालीन ठेकेदार द्वारा संस्थान के स्वार्थ में बाधित होते रहे।

वर्तमान चुनौतियां और मांग

2007 में हल्दीघाटी पर्यटन समिति एवं प्रेस क्लब द्वारा बंद पड़े कार्यो को पुनः आरम्भ कराने की मांग पर 2007 में बामुश्किल आरम्भ हुए लेकिन 2008 में 5 बीघा चारागाह सरकारी जमीन जो राष्ट्रीय स्मारक की लैंड स्केपिंग हेतु आरक्षित।

"परिणामस्वरूप हल्दीघाटी की पहचान आज यह घटनाक्रम जनता, सरकार व स्थानीय जनप्रतिनिधियों के मुंह पर किसी उपेक्षा से कम भी नहीं है।"

वर्तमान में बन रहे राजमार्ग के कार्यों में भी लाभान्वित करने हेतु विशेष प्रयास किया जा रहा है। पारदर्शी तरीके से हल्दीघाटी का विकास कराते हुए मूल स्मारकों क पहचान देने से रोका जाए एवं महाराणा प्रताप के आदर्शों के विपरीत है। उक्त ज्ञापन कमल किशोर पालीवाल संस्थापक हल्दीघाटी पर्यटन समिति एवं प्रेस क्लब ने सोपा।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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