हल्दीघाटी में गूंजी चेतक की टापें: 450वें शौर्य दिवस पर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप को नमन
हल्दीघाटी की पावन धरा पर 450वें शौर्य दिवस का अनूठा संगम देखने को मिला। चेतक की स्मृतियों से लेकर रणभूमि की दीपांजलि तक, कैसे वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की शौर्य गाथा ने एक बार फिर इतिहास को जीवंत किया? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

हल्दीघाटी रणभूमि में 450वें शौर्य दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान राजसमंद पुलिस अश्व दल द्वारा चेतक समाधि पर पुष्प अर्पित किए गए।
हल्दीघाटी की ऐतिहासिक रणभूमि एक बार फिर वीर गाथाओं के स्मरण से गुंजायमान हो उठी। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती और हल्दीघाटी युद्ध की 450वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रमों के दौरान समूचा क्षेत्र देशभक्ति और शौर्य के रंग में सराबोर नजर आया। विक्रम संवत के अनुसार प्रताप जयंती के आयोजन के अगले दिन, 18 जून को ईस्वी संवत की तिथि पर हल्दीघाटी युद्ध की 450वीं वर्षगांठ 'शौर्य दिवस' के रूप में पूर्ण श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाई गई।
इतिहास को जीवंत करते हुए सुबह से ही रक्त तलाई से बलीचा स्थित चेतक समाधि तक का छह किलोमीटर का क्षेत्र महाराणा प्रताप के स्वामिभक्त अश्व चेतक की स्मृतियों से भर उठा। राजसमंद पुलिस के अश्व दल द्वारा महाराणा प्रताप के पराक्रम और चेतक के बलिदान को नमन करते हुए किया गया प्रदर्शन आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा। राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया ने चेतक समाधि पर अश्व पूजन कर इस गौरवमयी यात्रा का शुभारंभ किया, जिसके पश्चात पुलिस जवानों ने रक्त तलाई तक चेतक की शौर्य यात्रा का सांकेतिक प्रदर्शन किया। ऐतिहासिक दर्रे में तहसीलदार डॉ. सुरेश नाहर ने अगवानी की, जिसके बाद रक्त तलाई में विधिवत 'चेतक स्मृति अश्व मेले' का सूत्रपात हुआ।
यह आयोजन पशुपालन विभाग, पर्यटन विभाग, हल्दीघाटी पर्यटन समिति और पंचायत समिति के समन्वित प्रयासों का परिणाम था। उपखंड अधिकारी भगीरथ सिंह लखावत की अध्यक्षता में संपन्न इस कार्यक्रम में अश्वपालकों का विशेष सम्मान किया गया, साथ ही प्रदेश युवा मोर्चा अध्यक्ष शंकरलाल गोरा के मुख्य आतिथ्य में अश्व प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिसके परिणामों का निर्धारण डॉ. कुलदीप कौशिक और उनकी विशेषज्ञ टीम द्वारा किया गया। हल्दीघाटी पर्यटन समिति के संस्थापक कमल मानव और अध्यक्ष विनोद पालीवाल ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए क्षेत्र के विकास पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान रणभूमि रक्त तलाई में शहीदों को भावपूर्ण दीपांजलि दी गई, जहाँ समवेत स्वर में हनुमान चालीसा का पाठ कर अमर बलिदानियों को नमन किया गया। दीपकों से स्वस्तिक और ॐ की आकृति उकेरकर दी गई श्रद्धांजलि ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर मुस्लिम समाज द्वारा हाकिम खान सूर के स्मारक पर चादर पेश की गई, जो महाराणा प्रताप के सहयोगी योद्धाओं के प्रति सम्मान और सांप्रदायिक सौहार्द का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस ऐतिहासिक आयोजन में कोठारिया के वीरेंद्र सिंह चौहान, संगीता चौहान, विकास अधिकारी हनुवीर सिंह विश्नोई, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। शाहीबाग में आयोजित भजन संध्या ने उत्सव में आध्यात्मिक गरिमा का संचार किया। 19 जून को सांसद महिमाकुमारी मेवाड़ और कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा के सानिध्य में पुरस्कार वितरण के साथ इस ऐतिहासिक आयोजन का समापन हुआ। यह आयोजन न केवल महाराणा प्रताप के शौर्य को पुनर्जीवित करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को त्याग और राष्ट्रप्रेम का संदेश भी देता है।

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