मेवाड़ में गूंजे गुरुवचन: कोमल मुनि महाराज ने अहंकार, क्रोध व मोह पर दिया आत्मजागृति का संदेश
आमेट के महावीर भवन में पूज्य कोमल मुनि महाराज व हर्षित मुनि महाराज के सान्निध्य में आयोजित प्रवचन सभा में अहंकार, क्रोध नियंत्रण, मुक्ति मार्ग और जीवन की सार्थकता पर गहन संदेश दिए गए। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति व सम्मान समारोह के साथ कार्यक्रम प्रेरणादायी रहा।

आमेट। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ आमेट के महावीर भवन में सोमवार को एक आध्यात्मिक वातावरण तब और प्रखर हो उठा, जब पूज्य गुरुदेव कोमल मुनि महाराज और नवदीक्षित हर्षित मुनि महाराज के पावन सान्निध्य में प्रवचन का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रावक–श्राविकाओं ने न केवल दर्शन-वंदना की, बल्कि गुरुदेव के प्रेरक संदेशों से जीवन में परिवर्तन का संकल्प भी लिया।
गुरुदेव कोमल मुनि महाराज ने प्रवचन के आरंभ में कहा कि अहंकार को जीत लेना ही आध्यात्मिक प्रगति का पहला सोपान है। मनुष्य जैसे-जैसे अहंकार से दूरी बनाता है, आत्म-सम्मान अपने आप प्रगाढ़ हो जाता है। उन्होंने कहा कि क्रोध व्यक्तित्व को जला देता है, जबकि इसके नियंत्रण से व्यक्ति का स्वरूप अद्वितीय और श्रेष्ठ बन जाता है।
मुक्ति मार्ग पर प्रकाश डालते हुए गुरुदेव ने कहा कि मुक्ति सहज नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि से प्राप्त होने वाली अवस्था है। उन्होंने श्रावकों को आगाह किया कि मोह को त्याग कर ही मुक्ति का पथ प्रशस्त हो सकता है। उन्होंने आधुनिक जैन समाज की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि समय रहते जागने की आवश्यकता है, क्योंकि आज का मनुष्य परमार्थ को छोड़कर स्वार्थ की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
जीवन को ‘कोहिनूर’ बताते हुए गुरुदेव ने कहा कि लोग अपने अनमोल जीवन को व्यर्थ साधनों में नष्ट कर रहे हैं। जीवन में उत्साह आवश्यक है, पर वह अधर्म में नहीं, धर्म के मार्ग में होना चाहिए। उन्होंने श्रावकों का आह्वान किया कि वे अपनी ऊर्जा और समय को उच्च आध्यात्मिक लक्ष्यों की ओर समर्पित करें।
कार्यक्रम में मेवाड़ संयुक्त महिला मंडल की अध्यक्षा श्रीमती शालिनी तातेड़ का श्री संघ की ओर से शॉल और माला पहनाकर सम्मान किया गया। उपाध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों का भी स्वागत किया गया। इस दौरान कुँवारिया श्री संघ के सदस्यों सहित नाथद्वारा और देवगढ़ से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित रहीं और गुरुदेव का आशीर्वाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम में सुरेंद्र सूर्या, शांतिलाल सिरोया, राकेश हिरण, प्रकाशचंद्र बडोला, कैलाश हिरण, नानालाल कोठारी, सुशील सूर्या, अनिल मुनोट, दिनेश सरनोत, पवन मेहता, विनोद बाबेल, पारस बाबेल, भंवरलाल सरनोत, ललित डांगी, सुरेश डांगी, उदय सिंह पंवार, धर्मचंद खाब्या, मदनलाल सेन, सुरेश दक, अनमोल सरनोत सहित कई गणमान्य श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन नरेंद्र बडोला ने किया।
महावीर भवन में आयोजित यह प्रवचन सभा न केवल आध्यात्मिक ज्ञान का स्रोत बनी, बल्कि इससे उपस्थित जनमानस में जीवन को नई दृष्टि से समझने की प्रेरणा भी जागृत हुई।
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Pratahkal Bureau
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