राजसमंद। विश्व की गौरवशाली धरोहरों में शुमार और स्थापत्य कला के अद्भुत संगम कुम्भलगढ़ दुर्ग की प्राचीरों ने गुरुवार को महामहिम राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े की उपस्थिति में इतिहास के गौरवशाली पन्नों को एक बार फिर जीवंत कर दिया। अपनी राजस्थान यात्रा के दौरान दोपहर में कुम्भलगढ़ पहुंचे महामहिम राज्यपाल ने महाराणा प्रताप की पावन जन्मस्थली का न केवल दौरा किया, बल्कि दुर्ग के प्रत्येक कोण को निहारते हुए इसके ऐतिहासिक वैभव को अत्यंत बारीकी से समझा।

दुर्ग परिसर में राज्यपाल का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस अवसर पर कुम्भलगढ़ विधायक श्री सुरेन्द्र सिंह राठौड़, जिला कलक्टर श्री अरुण कुमार हसीजा और जिला पुलिस अधीक्षक श्री हेमंत कालाल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। राज्यपाल ने दुर्ग के विभिन्न भागों का पैदल भ्रमण कर मेवाड़ के स्थापत्य कौशल का साक्षात अवलोकन किया। हेरिटेज सोसायटी के सचिव श्री कुबेर सिंह सोलंकी ने उन्हें मेवाड़ के वीर शासकों के योगदान और दुर्ग की सामरिक व सांस्कृतिक महत्ता से अवगत कराया।

राज्यपाल श्री बागड़े ने कुम्भलगढ़ की विशाल प्राचीर और इसकी विश्वस्तरीय पहचान की प्रशंसा करते हुए इसे देश की अमूल्य थाती करार दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी ऐतिहासिक विरासतें ही हमारी सांस्कृतिक अस्मिता को जीवंत रखती हैं और आने वाली पीढ़ियों को उनके गौरवपूर्ण अतीत से जोड़ती हैं। उन्होंने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि दुर्ग के संरक्षण कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। इसके साथ ही, देशी और विदेशी पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए दुर्ग परिसर में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान केंद्रित करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। कुम्भलगढ़ का यह दौरा न केवल एक औपचारिकता रही, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि हमारी सांस्कृतिक धरोहरों का संवर्धन ही राष्ट्र की वास्तविक प्रगति है।

Pratahkal Newsroom

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