राजसमंद के कांकरोली स्थित द्वारकाधीश मंदिर में फागोत्सव के तहत मंगलवार शाम को गोवर्धन चौक में राल दर्शन का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े।

दर्शन का समय और कार्यक्रम

  • ब्रजभूषण लालजी महाराज के उत्सव अवसर पर ठाकुरजी के मंगला दर्शन सुबह 7:10 बजे खुले।
  • इसके बाद शृंगार दर्शन सुबह 9:15 बजे कराए गए।

राल महोत्सव की मुख्य रस्में

शयन समय रत्न चौक में मंदिर मुखिया कृष्ण कांत एवं गोविंद गोपाल द्वारा ठाकुरजी के सन्मुख राल उड़ाई गई। अष्टछाप कवियों की परंपरा अनुसार कीर्तनकारों ने राल महोत्सव पर भावपूर्ण कीर्तन प्रस्तुत किए।

गोवर्धन चौक में राल जलाकर आम दर्शनार्थियों को दर्शन कराए गए।

धार्मिक एवं पौराणिक महत्व

साहित्यकार डॉ. राकेश तैलंग ने बताया कि: "राल द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण की ऐश्वर्य लीला का नाट्य रूप है। यह लीला दावानल से बृजवासियों की रक्षा से जुड़ी पौराणिक कथा का स्मरण कराती है।"

राल का ताप शीत ऋतु के अंत और ग्रीष्म ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है। इस भव्य आयोजन से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया।

Pratahkal Bureau

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