राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ढेलाणा के विद्यार्थियों ने चलाया पक्षी संरक्षण अभियान
भीषण गर्मी के दौरान पक्षियों को राहत देने के लिए आमेट के ढेलाणा स्कूल में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने मिलकर परिंडे लगाए और दाने-पानी की व्यवस्था की।

राजसमंद जिले के आमेट स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ढेलाणा में ग्रीष्मकालीन समाज सेवा शिविर के दौरान विद्यार्थियों ने पक्षियों के लिए परिंडे लगाकर जल और भोजन की व्यवस्था की।
आमेट। भीषण गर्मी के प्रकोप और तपते सूरज के बीच जीव-जंतुओं के संरक्षण का बीड़ा उठाते हुए राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ढेलाणा के विद्यार्थियों ने एक अनुकरणीय पहल की है। ग्रीष्मकालीन समाज सेवा शिविर के अंतर्गत आयोजित इस विशेष अभियान में विद्यार्थियों ने पक्षियों के लिए दाने-पानी की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की। अभियान का शुभारंभ करते हुए समाज सेवा शिविर प्रभारी संजू शर्मा ने स्वयं विद्यालय परिसर में परिंडा बांधकर इसकी शुरुआत की, जिसके बाद विद्यार्थियों ने क्षेत्र में पक्षियों की जान बचाने के लिए परिंडे स्थापित किए।
इस अवसर पर दल प्रभारी एवं शारीरिक शिक्षक मनोज कुमार शर्मा ने "पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन" विषय पर विचार व्यक्त करते हुए पक्षियों को प्रकृति की अनमोल कृति बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार का नैतिक दायित्व है कि वे अपने घर पर कम से कम एक दाना पात्र और एक परिंडा अवश्य लगाएं तथा उनमें नियमित रूप से ताजा पानी भरें। शिविर प्रभारी संजू शर्मा ने वर्तमान परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए कहा कि संरक्षण के अभाव में पक्षियों की अनेक प्रजातियां लुप्त होती जा रही हैं, जबकि पर्यावरण संतुलन के लिए उनका अस्तित्व अनिवार्य है। उन्होंने जीव-जंतुओं को राष्ट्रीय धरोहर बताते हुए उनके संरक्षण को पुनीत कार्य की संज्ञा दी।
इस सामाजिक सरोकार के अभियान को गति देते हुए शिविर के प्रत्येक विद्यार्थी ने संकल्प लिया कि वे अपने-अपने घरों पर भी परिंडे स्थापित करेंगे। इस पुनीत कार्य में शिवरार्थी आभा, अनिल, अनमोल, भावना, चेतना, धर्मचंद, दिनेश, खुशबू, हुमराम, किस्मत, ललिता, लक्ष्मी, नारायण, निलेश, पूजा, प्रहलाद, रीना, सोनिया, सुनील एवं योगेश ने पूरी निष्ठा के साथ अपना अमूल्य सहयोग प्रदान किया। शिविर प्रभारी संजू शर्मा ने जानकारी दी कि विद्यार्थियों का यह प्रयास न केवल पक्षियों को राहत पहुंचाएगा, बल्कि समाज में जीव दया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक सकारात्मक संदेश भी प्रेषित करेगा।

