देवगढ़ में मुहर्रम जुलूस पर संकट, रूट को लेकर प्रशासन से गतिरोध
देवगढ़ में परंपरागत रूट की मांग को लेकर प्रशासन और मुस्लिम समुदाय के बीच असहमति के कारण लगातार दूसरे वर्ष ताजियों का जुलूस नहीं निकल सका।

देवगढ़ में ताजियों के जुलूस के रूट को लेकर प्रशासन के साथ जारी विवाद के बीच अपनी बात रखते हुए मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि और उपस्थित लोग।
देवगढ़। मुहर्रम के पवित्र अवसर पर इस वर्ष भी देवगढ़ की गलियों में ताजियों की गूँज सुनाई नहीं दी, बल्कि वहां एक गहरा सन्नाटा पसर गया। परंपरागत रूट की मांग को लेकर प्रशासन और मुस्लिम समुदाय के बीच उपजे गतिरोध के कारण इस साल भी ताजियों का जुलूस नहीं निकल सका। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब मुस्लिम समुदाय ने प्रशासन द्वारा निर्धारित किए गए नए रूट का कड़ा विरोध करते हुए ताजियों को बाहर निकालने से पूर्णतः इनकार कर दिया है।
संपूर्ण घटनाक्रम का सार यह है कि मुस्लिम समुदाय का स्पष्ट आरोप है कि प्रशासन उन्हें वर्षों पुरानी और परंपरागत रूट के स्थान पर एक नवीन रूट अपनाने के लिए विवश कर रहा है। समुदाय के प्रतिनिधियों का तर्क है कि प्रस्तावित नया रूट उनकी धार्मिक आस्था और सदियों पुरानी परंपराओं के सर्वथा विपरीत है, जिसे उन पर जबरन थोपने का प्रयास किया जा रहा है। प्रतिनिधियों का दावा है कि उन्होंने इस संबंध में प्रशासन से बार-बार गुहार लगाई, अपनी मांगों को रखा, लेकिन उनकी आपत्तियों पर कोई उचित सुनवाई नहीं हुई।
इस प्रशासनिक अडिगता और संवादहीनता का ही परिणाम है कि गम और इबादत के इस महत्वपूर्ण अवसर पर देवगढ़ का मुस्लिम समुदाय मुहर्रम का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाने से वंचित रह गया। गलियों में गूंजने वाले मातम के स्वरों के स्थान पर पसरा यह सन्नाटा न केवल स्थानीय प्रशासन की विफलता को रेखांकित करता है, बल्कि समुदाय की अपनी धार्मिक परंपराओं को लेकर अटूट निष्ठा और विरोध के स्वर को भी प्रदर्शित करता है।

