उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में पुरानी बीमा पॉलिसी बंद कराकर जमा रकम ब्याज सहित वापस दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगों ने एक शिक्षक की जीवनभर की जमा-पूंजी पर हाथ साफ कर दिया। जालसाजों ने खुद को भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) का अधिकारी बताकर शिक्षक को अपने जाल में फंसाया और अलग-अलग बैंक खातों में कुल 29 लाख 17 हजार 490 रुपये ट्रांसफर करा लिए। पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, साइबर अपराधियों ने शिक्षक से संपर्क कर खुद को IRDAI का उच्च अधिकारी बताया। उन्होंने शिक्षक को विश्वास दिलाया कि उनकी पुरानी बंद पड़ी बीमा पॉलिसी का पूरा प्रीमियम ब्याज सहित वापस मिल सकता है। अपनी बात को विश्वसनीय बनाने के लिए ठगों ने व्हाट्सऐप के माध्यम से फर्जी पहचान पत्र (ID Cards) और लाखों रुपये की मैच्योरिटी राशि वापस मिलने से संबंधित नकली सरकारी चालान भी भेजे।

फर्जी दस्तावेजों के जरिए शिक्षक का भरोसा जीतने के बाद आरोपियों ने रकम वापस दिलाने के नाम पर अलग-अलग शुल्क वसूलना शुरू कर दिया। उन्होंने पॉलिसी निरस्तीकरण शुल्क, सरकारी टैक्स, फाइल चार्ज और प्रोसेसिंग फीस सहित विभिन्न मदों का हवाला देकर किश्तों में पैसे मांगे। बड़ी रकम ब्याज सहित वापस मिलने की उम्मीद में शिक्षक ठगों के बताए बैंक खातों में लगातार पैसे ट्रांसफर करते रहे। इस तरह आरोपियों ने उनसे कुल 29 लाख 17 हजार 490 रुपये ऐंठ लिए।

लगातार भुगतान करने के बावजूद जब शिक्षक को कोई रकम वापस नहीं मिली और आरोपियों ने अतिरिक्त पैसों की मांग जारी रखी, तब उन्हें संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने मामले की वास्तविकता जानने के लिए संबंधित विभागों के वास्तविक कार्यालयों में जाकर अधिकारियों से संपर्क किया। जांच-पड़ताल के दौरान उन्हें पता चला कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई है और व्हाट्सऐप पर भेजे गए सभी दस्तावेज फर्जी हैं। ठगी का खुलासा होने के बाद पीड़ित ने तत्काल साइबर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।

साइबर थाना पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, शिक्षक की शिकायत के आधार पर आईटी एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। ठगी की रकम जिन बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है, उन्हें फ्रीज कराने की प्रक्रिया जारी है। साथ ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीम लगाई गई है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

हापुड़ पुलिस ने आमजन से अपील की है कि अनजान नंबरों से आने वाली कॉल, मैसेज और व्हाट्सऐप पर मिलने वाले आकर्षक ऑफर्स के झांसे में न आएं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बीमा कंपनियों या IRDAI का कोई भी अधिकारी फोन पर गोपनीय बैंकिंग जानकारी या अग्रिम शुल्क नहीं मांगता है। साइबर ठगी का शिकार होने पर बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं। समय रहते सूचना मिलने पर ठगी गई रकम वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

Sunil Giri

Sunil Giri

नाम: सुनील गिरि

वर्तमान पद: जिला संवाददाता

कार्यक्षेत्र: हापुड़ (उत्तर प्रदेश)

बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति एवं जिला स्तर की सभी बीट

विशेषज्ञता: राजनीतिक विश्लेषण, अपराध संबंधी कवरेज और जिला स्तरीय रिपोर्टिंग

परिचय 

सुनील गिरि उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह हापुड़ से जिला संवाददाता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सुनील गिरि मुख्य रूप से राजनीति और क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। राजनीतिक विषयों पर सटीक विश्लेषण करने के साथ-साथ वह जिले की हर छोटी-बड़ी गतिविधि और जनसरोकार के सभी मुद्दों को नियमित रूप से कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव

सुनील गिरि को टीवी, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 2002 से (20 से अधिक वर्षों का) लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह निम्नलिखित प्रमुख मीडिया संस्थानों व न्यूज़ चैनलों के साथ जुड़कर अपनी सेवाएं दे रहे हैं:

  • पंजाब केसरी टीवी
  • इंडिया डेली 24×7 न्यूज़ चैनल
  • MH1 न्यूज़ चैनल
  • रॉयल न्यूज़ (वेबसाइट)
  • इंडिया पब्लिक खबर (वेबसाइट)

शैक्षणिक योग्यता

उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं (12th Pass) तक पूरी की है। दो दशकों से अधिक समय से हापुड़ जिले में लगातार सक्रिय रहने के कारण क्षेत्र की सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव बहुत गहरा है।

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