केलवा के शांतिनगर में गूंजे जयकारे: भव्य पोथी यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का शंखनाद, उमड़ा जनसैलाब
केलवा के शांतिनगर में भव्य पोथी यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। पूज्य संत निर्मल राम महाराज ने कथा के महत्व को समझाते हुए इसे कलियुग में मोक्ष का मार्ग बताया। पारंपरिक वेशभूषा में उमड़े श्रद्धालुओं और मंगल कलश यात्रा से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। पढ़िए इस दिव्य आयोजन की पूरी रिपोर्ट।

केलवा/आमेट। भक्ति, शक्ति और भारतीय संस्कृति के अद्भुत संगम के साथ केलवा क्षेत्र के समीपवर्ती शांतिनगर आमेट रोड पर श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का भव्य आगाज हुआ। आयोजन के प्रथम दिन जब श्रद्धा का सैलाब सड़कों पर उतरा, तो संपूर्ण क्षेत्र कृष्णमय हो गया। गाजे-बाजे और पारंपरिक मंगल गीतों के बीच निकाली गई भव्य पोथी यात्रा ने न केवल धार्मिक उत्साह को चरम पर पहुँचाया, बल्कि क्षेत्र के वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।
आयोजन का शुभारंभ एक विशाल शोभायात्रा के साथ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में सम्मिलित हुए। सिर पर मंगल कलश धारण किए सैकड़ों महिलाएं भजन-कीर्तन करते हुए चल रही थीं, तो वहीं पुरुष श्रद्धालु 'जय श्री कृष्ण' और 'जय श्री राम' के गगनभेदी जयकारों से आकाश गुंजा रहे थे। यह शोभायात्रा मुख्य मार्गों से होती हुई कथा स्थल पर पहुँची, जहाँ मुख्य यजमानों द्वारा श्रीमद् भागवत पोथी का विधिवत पूजन और वंदन किया गया।
पोथी पूजन के पश्चात व्यासपीठ पर विराजमान पूज्य संत निर्मल राम महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कथा का विधिवत शुभारंभ किया। महाराज श्री ने प्रथम दिन भागवत महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि श्रीमद् भागवत केवल एक कथा नहीं, बल्कि साक्षात श्रीकृष्ण का शब्दमय विग्रह है। यह दिव्य ग्रंथ मानव जीवन को सत्य, धर्म और अटूट भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। महाराज श्री ने जोर देकर कहा कि भागवत श्रवण से न केवल व्यक्ति के अंतःकरण और संस्कारों की शुद्धि होती है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने वाला एकमात्र पावन मार्ग है।
वर्तमान समय की विसंगतियों पर चर्चा करते हुए संत निर्मल राम ने कहा कि घोर कलियुग में हरि नाम संकीर्तन और भागवत कथा ही जीव के उद्धार का सबसे सरल माध्यम है। कथा श्रवण करने से मन की अशांति और विकारों का नाश होता है तथा समाज में आपसी सद्भाव, प्रेम और करुणा की भावना जागृत होती है। कथा के प्रथम दिन उमड़ी भारी भीड़ ने यह सिद्ध कर दिया कि आज भी सनातनी परंपराओं और आध्यात्मिक ज्ञान के प्रति जनमानस में अगाध श्रद्धा है। इस आयोजन ने न केवल शांतिनगर बल्कि पूरे केलवा क्षेत्र में भक्ति की एक नई अलख जगा दी है।

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