राजसमंद जिले के प्रसिद्ध चारभुजा मंदिर में पार्किंग व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच अब जवाब सामने आया है। पार्किंग टेंडर और शुल्क व्यवस्था पर सवाल उठाने वालों से कहा गया है कि यदि वर्तमान पार्किंग व्यवस्था गलत है तो कुछ वर्ष पहले, जब उनके ही परिवार के सदस्य पार्किंग व्यवस्था संभाल रहे थे और शुल्क लिया जा रहा था, तब इसका विरोध क्यों नहीं किया गया।

जवाब में यह भी सवाल उठाया गया कि यदि उस समय पार्किंग व्यवस्था सही थी तो आज अचानक उसे गलत बताने का आधार क्या है। पक्ष रखने वालों के अनुसार वर्तमान पार्किंग व्यवस्था का टेंडर पूरी प्रक्रिया और पारदर्शिता के साथ किया गया था और इसकी जानकारी संबंधित लोगों को भी थी।

इतना ही नहीं, आरोप लगाया गया है कि विरोधी पक्ष से जुड़े कुछ लोगों ने भी टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया था। ऐसे में मौजूदा व्यवस्था पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर पुराने रिकॉर्ड और टेंडर प्रक्रिया का हवाला दिया गया है।

पक्ष रखने वालों का कहना है कि पार्किंग व्यवस्था केवल शुल्क वसूली तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा, वाहनों की व्यवस्थित पार्किंग और मंदिर क्षेत्र में सुचारु यातायात के लिए भी जरूरी है। साथ ही, इस व्यवस्था से गांव के करीब 5 से 7 युवाओं को रोजगार भी मिल रहा है।

वहीं, यह भी कहा गया कि यदि व्यवस्था में कोई कमी है तो संवाद और सुझाव के जरिए उसका समाधान निकाला जाना चाहिए। बिना ठोस तथ्यों के श्रद्धालुओं के बीच भ्रम या अविश्वास पैदा करना उचित नहीं है।

चारभुजा मंदिर की पार्किंग व्यवस्था और टेंडर को लेकर उठे सवालों के बीच पुराने रिकॉर्ड, टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता, शुल्क व्यवस्था और स्थानीय युवाओं को मिल रहे रोजगार का मुद्दा अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

Pratahkal Bureau

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