भीम (राजसमंद)। राजस्थान के राजसमंद जिले के भीम कस्बे में इन दिनों मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है। एक तरफ जहां पूरा देश नए साल के स्वागत के जश्न में डूबा था, वहीं भीम के कुम्हार मोहल्ला निवासी एक परिवार की आंखें अपने लाडले की राह तकते-तकते पथरा गई हैं। मध्य प्रदेश के नीमच में सीआरपीएफ कैंप में तैनात कांस्टेबल नंदकिशोर प्रजापत रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गए हैं। छुट्टी की अर्जी मंजूर होने के बाद घर आने की खुशी लेकर निकले नंदकिशोर का आज तक कोई सुराग नहीं लग पाया है, जिससे पूरे क्षेत्र में गहरी चिंता और आक्रोश का माहौल है।

घटनाक्रम के अनुसार, नंदकिशोर प्रजापत नीमच स्थित सीआरपीएफ कैंप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने 50 दिनों की लंबी छुट्टी ली थी और 27 दिसंबर 2025 को उन्हें अपने पैतृक गांव भीम पहुंचना था। परिजनों ने बताया कि 26 दिसंबर को अंतिम बार उनसे फोन पर बात हुई थी, लेकिन उसके बाद से ही उनका मोबाइल नंबर 9407709906 लगातार बंद आ रहा है। अनहोनी की आशंका के बीच जब परिवार ने नीमच संपर्क किया, तो होश उड़ा देने वाली जानकारी सामने आई। कैंप अधिकारियों के अनुसार नंदकिशोर का मोबाइल और सारा सामान कैंप के अंदर ही पड़ा मिला, जबकि वे रिकॉर्ड में छुट्टी पर प्रस्थान कर चुके हैं।

सूचना मिलते ही जवान के पुत्र पंकज प्रजापत और उनके चचेरे भाई पवन कुमार आनन-फानन में नीमच पहुंचे। सीआरपीएफ कार्यालय में अधिकारियों ने उन्हें केवल इतना बताया कि नंदकिशोर आधिकारिक तौर पर छुट्टी पर जा चुके हैं। लापता जवान के भाई महेंद्र प्रजापत ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अपना दर्द बयां किया है। उन्होंने बताया कि उन्हें केवल एक गेट की सीसीटीवी फुटेज दिखाई गई और अधिकारियों का रवैया ढुलमुल रहा। अधिकारियों ने तर्क दिया कि जब तक जवान छुट्टी की अवधि पूरी कर वापस नहीं लौटता, तब तक नियमानुसार सख्त कार्रवाई नहीं की जा सकती। इस असंवेदनशील जवाब ने परिवार की उम्मीदों को गहरा धक्का पहुंचाया है।

लापता जवान नंदकिशोर प्रजापत का कद लगभग 5 फीट 3 इंच है और वे एकहरे बदन के हैं। प्रत्यक्षदर्शियों या सीसीटीवी फुटेज के आधार पर वे प्रस्थान के समय पीटी ड्रेस पहने हुए थे। पुत्र पंकज ने अब नीमच पुलिस थाने में अपने पिता की गुमशुदगी की औपचारिक रिपोर्ट दर्ज करवाई है, लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं।

घर की स्थिति हृदय विदारक बनी हुई है। 70 वर्षीय बुजुर्ग मां हंजा देवी और पत्नी गंगा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। पुत्र पंकज और राहुल के साथ-साथ भाई महेंद्र भी दिन-रात नीमच और भीम प्रशासन के बीच दौड़ लगा रहे हैं। एक सैनिक जो देश की सुरक्षा का जिम्मा उठाता है, आज वह खुद किस हाल में है, यह सवाल पूरे भीम कस्बे को कचोट रहा है। प्रशासन की सुस्ती और सीआरपीएफ की चुप्पी के बीच यह मामला अब एक अनसुलझी पहेली बनता जा रहा है, जिसने सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली और छुट्टी पर जाने वाले जवानों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

Pratahkal Newsroom

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