राजसमंद। जिंदगी में आप चाहे कितनी ही मुश्किलों से घिरे हों लेकिन आपने किसी काम को पूरा करने की ठान ली है तो कोई भी आपको रोक नहीं सकता है। ऐसे ही मजबूत जज्‍बे की मिसाल हैं राजसमन्द जिले के रहने वाली पैडवुमन भावना पालीवाल। आज महिला दिवस पर विशेष रूप से उनकी कहानी चर्चा में है क्योंकि लोगों ने उन्हें ताने मारे, उनका मजाक उड़ाया और विरोध भी किया, पर भावना ने हार नहीं मानी। आज वे लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।

माहवारी से जुड़ी भ्रांतियों के खिलाफ 17 वर्षों का लंबा संघर्ष

पीरियड्स को लेकर हमारे समाज में कई तरह के धार्मिक आडंबर व्याप्त हैं। पीरियड्स के कारण अक्सर लड़कियों को स्कूल तक छोड़ देना पड़ता है और गंदे कपड़े के इस्तेमाल के कारण कई महिलाएं अपनी कोख तक खो देती हैं। मासिक धर्म के प्रति फैले इन आडंबरों को दूर करने के लिए पिछले 17 वर्षों से पैडवुमन भावना पालीवाल ने 'पीरियड पाठशाला', 'स्त्री स्वाभिमान', 'रेड डॉट', 'चुप्पी तोड़ो', 'मेरी लाडो', 'हैप्पी टू ब्लीड' और 'अब पता चलने दो' सहित कई अभियान चलाकर महिलाओं को शिक्षित और जागरूक करने का बीड़ा उठाया है। भावना अपने इन्हीं अभियानों की वजह से आज 'पैडवुमन' के नाम से जानी जाती हैं।

बचपन की शर्मिंदगी ने दिया बदलाव का संकल्प

अपनी प्रेरणा के बारे में बताते हुए पालीवाल का कहना है कि — "बचपन में स्कूल समय में पहली बार पीरियड्स आए तो क्लासरूम में शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। यही नहीं हर जगह एक रूल बना दिया गया जैसे मुझे कोई श्राप सा लगा है, मैं डर सी गई थी लेकिन मन में एक सोच थी इसे बदलने की। जब बड़ी हुई तो देखा कि यह सिर्फ मेरी कहानी नहीं थी बल्कि हजारों लड़कियों की है, बस उसी दिन निश्चय कर लिया कि अब बदलाव लाकर रहूंगी।" शुरुआत में इस विषय को लेकर उन्हें कई जिल्लत और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। लोगों ने उन पर फब्तियां कसीं और कड़ा विरोध किया, लेकिन उनके कदम नहीं डगमगाए।

एक लाख महिलाओं तक निःशुल्क सेनेटरी पैड की पहुंच

पालीवाल द्वारा आज एक लाख से अधिक महिलाओं को निःशुल्क सेनेटरी पैड वितरण कर 600 से अधिक कार्यशालाओं का आयोजन किया गया जिससे समाज में बड़ा बदलाव आया है। आज जो महिलाएं माहवारी के समय कपड़ा छिपाकर रखती थीं, वे अब न केवल सेनेटरी पैड का उपयोग कर रही हैं बल्कि उनका सही निस्तारण भी सीख चुकी हैं। पालीवाल ने एक महिला संगठन भी बनाया है जो महिलाओं की वित्तीय साक्षरता, कौशल प्रशिक्षण, पर्यावरण संरक्षण, बेटी बचाओ और जरूरतमंदों की मदद करने का कार्य भी कर रहा है।

कौशल प्रशिक्षण से महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

भावना आज असल जिंदगी की वो 'पैडवुमन' बन चुकी हैं जो खुलकर इस विषय पर अपनी बात रखती हैं। वे केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे विधवा, विकलांग और जरूरतमंद महिलाओं को सिलाई, कंप्यूटर, पार्लर और सेल्फ डिफेंस का भी निःशुल्क प्रशिक्षण दे रही हैं ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। महिला सशक्तिकरण के लिए पालीवाल को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई बार सम्मानित किया जा चुका है और कई केंद्रीय मंत्रियों ने ट्वीट कर पूरे देश को उनके अभियानों के बारे में बताया है।

पीरियड पाठशाला: आदिवासी क्षेत्रों में जागरूकता की नई अलख

भावना मासिक धर्म को लेकर भ्रांतियों को दूर करने के लिए विशेष रूप से 'पीरियड पाठशाला' संचालित कर रही हैं। इसके तहत वे गांव-गांव जाकर महिलाओं और विशेषकर आदिवासी क्षेत्र की बेटियों को जागरूक कर रही हैं। भावना का मानना है कि — "बच्चियों को 11-12 की उम्र में ही मासिक धर्म की जानकारी दे देनी चाहिए।" वे अब अभिभावकों को भी इसके बारे में खुलकर बता रही हैं, जिससे समाज की सोच बदल रही है।

मासूम की पीड़ा ने बदली भावना की राह

इस सफर की शुरुआत एक मर्मस्पर्शी घटना से हुई थी। एक बार वे एक गांव के सरकारी स्कूल में बाल विवाह के दुष्प्रभाव को लेकर बच्चों को जानकारी दे रही थीं। इसी दौरान एक बच्ची अचानक रोते-रोते उनके पास आई। उसे देख भावना आहत हुईं क्योंकि वह बच्ची अपने जीवन के पहले पीरियड का सामना कर रही थी और इस स्थिति से पूरी तरह अनजान व भयभीत थी। बालिका के मन में बसी इसी पीड़ा और डर को दूर करने के लिए भावना ने ठानी और उनकी 'पीरियड पाठशाला' का जन्म हुआ।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली सराहना

भावना के उत्कृष्ट कार्य की सराहना राष्ट्रीय स्तर तक की जा चुकी है। उनके कार्य को देखते हुए उन्हें युवा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा 2024 में राजस्थान के 'यूथ आइकॉन' के तौर पर भारत मंडपम में बुलाकर सम्मानित किया गया। उन्हें 2019 में केंद्र सरकार ने राजस्थान की पहली डिजिटल वैन सौंपी। इसके अतिरिक्त वोडाफोन इंडिया फाउंडेशन की ओर से 'देश की वुमेन ऑफ वंडर' खिताब 2021 में दिया गया। उन्हें इंटरनेशनल यूथ सोसायटी की ओर से 'राष्ट्रीय महिला गौरव अवार्ड 2017', महिला अधिकारिता विभाग राजस्थान सरकार व फर्स्ट इंडिया द्वारा 'राजस्थान रत्न', राजस्थान पत्रिका द्वारा '40 अंडर 40 सम्मान', उदयपुर दोपहर द्वारा 'विशिष्ट अवार्ड', नेहरु युवा केंद्र राजसमन्द, विप्र फाउंडेशन द्वारा 'देश की तेजस्विनी महिला', हरियाणा में 'महिला रत्न अवार्ड', सीएससी इंडिया द्वारा 'डिजिटल बेटी सम्मान' और महिला अधिकारिता विभाग द्वारा 'राजसमन्द की विशिष्ट महिला' सहित कई संस्थाओं द्वारा सम्मान मिला है।

Pratahkal Bureau

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