ब्यावर में बकरों को मिला अभयदान, जीव दया का सबसे बड़ा रिकॉर्ड दर्ज
ब्यावर में महावीर स्वामी के सिद्धांतों पर चलते हुए जीव दया प्रेमियों ने एक ही दिन में 108 बकरों को बूचड़खानों से मुक्त कराकर नया जीवन प्रदान किया।

ब्यावर में आगामी ईद के त्योहार से पहले जीव दया प्रेमियों की टीम द्वारा बूचड़खानों से मुक्त कराए गए बकरों को वाहन में सुरक्षित रखकर नागौर की बकरा शाला भेजने की तैयारी करते हुए स्थानीय नागरिक और कार्यकर्ता।
ब्यावर। 24वें जैन तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के अहिंसावादी संदेश 'जियो और जीने दो' के सिद्धांत को आत्मसात करते हुए ब्यावर के इतिहास में जीव दया की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्धि दर्ज की गई है। आगामी बकरा ईद के त्योहार से पहले, 26 मई 2026 को एक ही दिन में सामूहिक संकल्प के साथ बूचड़खानों से कुल 108 (100 + 08) बकरों को सुरक्षित बचाकर जीवनदान यानी अभयदान दिया गया है। जैन समाज के इतिहास में एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में मूक पशुओं को क्रूरता के चंगुल से मुक्त कराने का यह अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है, जिसने पूरे क्षेत्र में जीव दया की एक नई अलख जगा दी है।
इस पुनीत और साहसिक अभियान को ब्यावर के सुप्रसिद्ध एस्ट्रोलॉजर एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ तथा जीव दया प्रेमी दिलीप नाहटा, जीव दया प्रेमी प्रवीण बडोला एवं जीव दया प्रेमी मनीष मूथा की संयुक्त टीम ने अपनी जान झोंककर अमली जामा पहनाया। पूरी टीम ने एक साथ मिलकर इन 108 बकरों को न केवल बूचड़खानों के खौफनाक माहौल से सकुशल बाहर निकाला, बल्कि जैन परंपरा के अनुसार इन सभी बकरों के कानों में कुड़की पहनाकर उन्हें 'अमरा बकरा' घोषित किया। इसके पश्चात, सभी मुक्त कराए गए बकरों को नागौर के समीप स्थित कुचेरा बकरा शाला में ले जाकर सुरक्षित छोड़ा गया, जहां उनके अंतिम समय तक के लिए उत्तम भोजन, पानी और संपूर्ण सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
उल्लेखनीय है कि इस टीम का मूक प्राणियों को बचाने का यह सिलसिला पिछले कई दिनों से निरंतर जारी है। इससे पूर्व भी, बीते 20 मई 2026 को जीव दया प्रेमी दिलीप नाहटा की टीम और जीव दया प्रेमी प्रवीण बडोला की टीम ने आपसी समन्वय से एक ही दिन में 52 बकरों को मौत के मुंह से सुरक्षित बचाया था। यदि पिछले सात दिनों के भीतर की बात की जाए, तो एस्ट्रोलॉजर एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ दिलीप नाहटा, प्रवीण बडोला और मनीष मूथा की त्रिमूर्ति टीम ने मिलकर कुल 160 (52 + 108) बेजुबान बकरों को बूचड़खानों से छुड़ाकर कुचेरा बकरा शाला पहुंचाया है और उन्हें नया जीवन प्रदान किया है।
जीव दया प्रेमी दिलीप नाहटा, प्रवीण बडोला और मनीष मूथा का दृढ़ता से मानना है कि इस ऐतिहासिक और बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन की खबर से संपूर्ण भारतवर्ष के लाखों-करोड़ों लोगों को भगवान महावीर द्वारा दिखाए गए दया और अहिंसा के मार्ग पर चलने की महान प्रेरणा मिलेगी। ब्यावर में जैन समाज की यह गौरवशाली परंपरा रही है कि यहाँ के लोग प्रतिवर्ष मूक बकरों को अभयदान देकर उन्हें जीवन का अधिकार सौंपते हैं। एक ही दिन में 108 बकरों को मुक्त कराने के इस अभूतपूर्व रिकॉर्ड कार्य की सफलता पर संपूर्ण जैन समाज, जीव दया प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न स्थानीय संगठनों ने इस मुहिम में अपना पूर्ण सहयोग देने वाले जांबाज सहयोगियों—जीव दया प्रेमी संयम मूथा, जीव दया प्रेमी वैभव मूथा, जीव दया प्रेमी ऋषभ कक्कड़, जीव दया प्रेमी सुनील रुपाणी, जीव दया प्रेमी आनंद सिंह, जीव दया प्रेमी मतिकान्त अग्रवाल, जीव दया प्रेमी सुरेश कुमावत, जीव दया प्रेमी अंकुश बोहरा, जीव दया प्रेमी रविंद्र मकाणा एवं समता युवा संघ सहित पूरी टीम को साधुवाद देते हुए हृदय से आभार व्यक्त किया है।

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