तिलकायत श्री की आज्ञा से आषाढ़ी तौल जारी, अनाज श्रेष्ठ और वर्षा सामान्य से अधिक का अनुमान
श्रीनाथजी मंदिर की आषाढ़ी तौल में इस वर्ष अनाज श्रेष्ठ और वर्षा सामान्य से अधिक रहने का अनुमान, जानिए पूरी परंपरा और परिणाम।

तस्वीर में श्रीनाथजी मंदिर के खर्च भंडार में मुख्य पंड्या परेश नागर और अन्य कर्मचारी पारंपरिक आषाढ़ी तौल की प्रक्रिया के दौरान तराजू के पास बैठे हुए नजर आ रहे हैं।
पुष्टिमार्गीय प्रधान पीठ प्रभु श्रीनाथजी की हवेली में प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को होने वाली पारंपरिक आषाढ़ी तौल का परिणाम जारी कर दिया गया है। तिलकायत श्री की आज्ञा से हुई इस प्राचीन परंपरा में इस वर्ष धान्य की पैदावार श्रेष्ठ रहने और वर्षा सामान्य से अधिक होने का अनुमान लगाया गया है।
श्रीनाथजी मंदिर के ‘खर्च भण्डार’ में रखी गई विभिन्न धान्यादी भौतिक वस्तुओं की तौल के आधार पर आगामी वर्ष की पैदावार, व्यापार और प्राकृतिक परिस्थितियों का पूर्वानुमान किया जाता है। इस परंपरा को ‘आषाढ़ी तौलना’ कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रकृति के प्रभाव को समझना और प्रभु की सेवा में किसी भी प्रकार के धान्य की कमी नहीं होने देना है।
आषाढ़ी तौल के परिणामों के आधार पर प्रभु की सेवा में आवश्यक जिन्सों का व्यवस्थित प्रबंधन किया जाता है, जिससे सेवा में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो। साथ ही तौल के सकारात्मक परिणामों से संपूर्ण पुष्टि सृष्टि अपने जीवन के प्रति सकारात्मक रूप से निश्चित हो सके।
प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी तिलकायत श्री की आज्ञा से पूर्णिमा के दिन तौल कर रखे गए धान आदि वस्तुओं को अगले दिन सुबह ग्वाल के दर्शनों में पुनः श्रीजी के मुख्य पंड्या परेश नागर के सान्निध्य में तौला गया। इस दौरान खर्च भंडार के भंडारी प्रकाशचंद्र सनाढय और कर्मचारी उपस्थित रहे। पुनः की गई तौल के आधार पर इस वर्ष धान्य की पैदावार को श्रेष्ठ बताया गया है।
श्रीजी के मुख्य पंड्या परेश नागर ने बताया कि इस वर्ष वर्षा सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि आषाढ़ में तीन आना, श्रावण में पांच आना, भाद्रपद (भादवा) में पांच आना और आसोज में दो आना वर्षा का अनुमान है। इसके साथ ही वायु पूर्व दिशा की रहने की बात कही गई है।
आषाढ़ी तौल में गुड़, नमक, मनुष्य और पशुओं में कमी का अनुमान लगाया गया है, जबकि इसके अलावा सभी जिन्सों में बढ़ोतरी नापी गई है। हरा मूंग, उड़द, सरसों और घास समान रहने का अनुमान बताया गया है।
परंपरा के अनुसार श्रीनाथजी मंदिर में प्रत्येक वर्ष छोटे-बड़े विभिन्न पात्रों में मूंग हरा, मक्का, बाजरा, ज्वार, तिल्ली, गेहूं सहित 27 भौतिक सामग्रियों को श्रीजी के मुख्य पंड्या और खर्च भंडारी आदि की देखरेख में तौला जाता है। इसके बाद इन पात्रों को खर्च भण्डार के एक कोठे में रख दिया जाता है।
इसके अगले दिन श्रावण कृष्ण प्रतिपदा को सभी पात्रों में रखी वस्तुओं को पुनः श्रीजी के मुख्य पंड्या आदि के सान्निध्य में तौला जाता है। इन वस्तुओं में हुई वृद्धि अथवा कमी के आधार पर आने वाले वर्ष में फसलों की स्थिति, धन-धान्य, पशुओं के चारे, आपदाओं, वर्षा की मात्रा और वायु के रुख का अनुमान लगाया जाता है।
आषाढ़ी तौल के परिणामों को आसपास के गांवों के ग्रामीण आगामी वर्ष की फसल बुवाई की योजना बनाने में आधार मानते हैं। वहीं कई अनाज व्यापारी भी इन संकेतों के आधार पर अपने व्यापार में स्टॉक और अन्य योजनाएं तैयार करते हैं।

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