आमेट। राजसमंद जिले के आमेट नगर की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं इन दिनों वेंटिलेटर पर हैं, और प्रशासन की इसी बेरुखी के खिलाफ अब जन-आक्रोश की मशाल जल उठी है। नगर के एकमात्र राजकीय उप जिला चिकित्सालय में व्याप्त घोर अव्यवस्थाओं, अनियमितताओं और मरीजों के साथ होने वाले कथित दुर्व्यवहार से त्रस्त होकर दो युवाओं ने प्रशासन के खिलाफ सीधी जंग का ऐलान कर दिया है। मंगलवार सुबह 7:00 बजे से पुष्पेंद्र जांगिड़ और पिंटू मेवाड़ा नामक दो युवकों ने अस्पताल के मुख्य द्वार के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

इस विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि 19 जनवरी को तैयार हुई थी, जब नगरवासियों ने लामबंद होकर चिकित्सा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव की मांग को लेकर उपखंड अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा था। उस ज्ञापन में अस्पताल के कर्मचारियों और चिकित्सा अधिकारियों द्वारा मरीजों के साथ किए जाने वाले अभद्र व्यवहार तथा अस्पताल परिसर में फैली अव्यवस्थाओं का विस्तार से उल्लेख किया गया था। जनता ने प्रशासन को सुधार के लिए सात दिनों का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन नौ दिन बीत जाने के बाद भी जब सरकार या अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो इन युवाओं को इस कठोर कदम के लिए विवश होना पड़ा।

अनशनकारी पुष्पेंद्र जांगिड़ और पिंटू मेवाड़ा का कहना है कि उन्होंने राज्य के चिकित्सा मंत्री से लेकर जिला कलेक्टर तक अपनी गुहार लगाई थी, लेकिन सत्ता के गलियारों में उनकी आवाज अनसुनी कर दी गई। अस्पताल में सुविधाओं के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है और आम जनता को बुनियादी इलाज के लिए भी अपमानित होना पड़ रहा है। युवाओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन और धरातल पर सुधार नहीं दिखता, तब तक उनका यह सत्याग्रह जारी रहेगा। नगरवासियों ने भी इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया है, जिससे इस छोटे से शहर में बड़े जन-आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। फिलहाल, दोनों युवक अस्पताल के बाहर डटे हुए हैं और प्रशासन की चुप्पी अब नगर के शांत माहौल में बड़े तूफान की आहट दे रही है।

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