आमेट में विश्व आदिवासी दिवस पर महारैली, पारंपरिक वेशभूषा में उमड़ा भील समाज
आमेट में विश्व आदिवासी दिवस पर भील समाज ने महारैली निकाली। पारंपरिक वेशभूषा, गीत-नृत्य और सभा में समाज की एकता पर जोर दिया गया।

तस्वीर में भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के तत्वावधान में विश्व आदिवासी दिवस पर आमेट में पारंपरिक वेशभूषा और अस्त्र-शस्त्र के साथ रैली निकालते हुए आदिवासी समाज के लोग दिखाई दे रहे हैं।
आमेट में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के तत्वावधान में आदिवासी समाज की महारैली निकाली गई। मेला ग्राउंड से शुरू हुई महारैली में भील समाज के बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। कई समाजजन पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र लेकर रैली में चले। आदिवासी गीतों की धुन पर नृत्य करते हुए लोगों ने गगनभेदी नारे लगाए।
महारैली मेला ग्राउंड से रवाना होकर वीर पत्ता सर्कल रोड, बस स्टैंड, गणेश चौक, सब्जी मंडी, गांधी चबूतरा, लक्ष्मी बाजार और रेलवे स्टेशन होते हुए तानवान, गादरोला, फालसिया, आसन और सेलागुड़ा पहुंची। इसके बाद रैली ढेलाणा भेरूनाथ मंदिर पहुंची, जहां इसका समापन आमसभा में हुआ।
रैली में किशन भील ढेलाणा, अमराराम, मांगीलाल, गोपीलाल, लक्ष्मणलाल, नारायणलाल, हिम्मत, राजूलाल सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।
आमसभा में मुख्य अतिथि आदिवासी जिला अध्यक्ष दौलतराम कोठारिया रहे। विशिष्ट अतिथियों में एडवोकेट रोशनलाल सोनगर, भारत मुक्ति मोर्चा जिला अध्यक्ष राजू बिकावास और सीआईडी संगठन के जिला अध्यक्ष कैलाश जवारिया शामिल रहे।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने समाज में शराबबंदी को बढ़ावा देने, युवाओं को आगे आने और सामाजिक संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया। समाज की संस्कृति, रीति-रिवाज, बोली-भाषा और पारंपरिक वेशभूषा को संरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी बताते हुए समाजजनों ने इसके संरक्षण का संकल्प लिया।
वक्ताओं ने राज्य सरकारों से आदिवासी समाज के कल्याण और राजनीतिक भागीदारी के लिए उचित अवसर उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को नेतृत्व के अवसर नहीं दिए गए तो आगामी चुनावों में समाज सामूहिक रूप से निर्णय लेकर मतदान करेगा। सभा में आदिवासी समाज के उत्थान, एकता और शिक्षा को लेकर भी विशेष जोर दिया गया।
राणा पूंजा की प्रतिमा स्थापित करने की मांग
आमसभा में समाज के वक्ताओं ने आमेट उपखंड मुख्यालय पर वीर राणा पूंजा की प्रतिमा स्थापित करने की मांग रखी। समाजजनों ने प्रशासन से प्रतिमा स्थापित कराने की मांग करते हुए इसके लिए प्रयास करने का निर्णय लिया। विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित महारैली और सभा में समाज की एकता, शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण तथा राजनीतिक भागीदारी से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से सामने आए।

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