आमेट में इतिहास पुरुष वीर पत्ता की प्रतिमा स्थापना के एकादशम समारोह के अवसर पर सोमवार को भव्य व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम सायं 5 बजे पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के सभागार में वीरवर पत्ता गौरव संस्थान के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता रावत जयवर्धन सिंह चुंडावत, ठिकाना आमेट ने की। कार्यक्रम में गुरुड़ शिखर के संत अवधूत शरण महाराज ने आशीर्वचन दिए, जबकि मुख्य वक्ता विश्व हिंदू परिषद, ब्यावर परियोजना के सह प्रमुख एवं चित्तौड़ प्रांत के पृथ्वी सिंह भोजपुरा रहे।



कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता, वीर पत्ता एवं महाराणा प्रताप के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत संस्थान के पदाधिकारी पुष्पेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह, सुरेश सोनी और मुकेश सिरोया ने मेवाड़ी पगड़ी, उपराणा, अंगवस्त्र, तलवार तथा वीर पत्ता की तस्वीर भेंट कर किया। इसके बाद चंद्रभानु सिंह ने वीर पत्ता की शौर्य प्रशस्ति का वाचन किया तथा गणपत लाल चौधरी ने संस्थान का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

मुख्य वक्ता पृथ्वी सिंह भोजपुरा ने कहा कि नई पीढ़ी को धर्म, संस्कृति और शौर्य की जानकारी महापुरुषों की जीवनी से मिलेगी। उन्होंने कहा कि मुगलों का मूल विचार सनातन संस्कृति को नष्ट करना था तथा मुगलों के समय विश्व में मेवाड़ मानवता की रक्षा का केंद्र था। उन्होंने कहा कि भारत की मातृ शक्ति सतीत्व की रक्षा के लिए जौहर करती थी। वीर पत्ता ने कम आयु में अदम्य शौर्य का परिचय दिया, जो आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपने बच्चों को ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराने का आह्वान करते हुए कहा कि चित्तौड़ में प्रतिमाओं के पत्थर नहीं, बल्कि जीवित प्राण लगे हैं।

संत अवधूत शरण महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि नेतृत्वकर्ता का आचरण पवित्र होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेवाड़ के महापुरुषों ने अपने नेतृत्व में सदैव पवित्र आचरण का पालन किया। परिस्थितियां कितनी भी विकट रही हों, उन्होंने कभी धर्म का साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने प्रत्येक सनातनी से भारतीय परिधान धारण करने तथा शिखा रखने का आह्वान किया। संत ने कहा कि आहार और व्यवहार में विकार से बचने के लिए शास्त्र प्रदत्त व्यवस्था को स्वीकार करना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान भगवत सिंह पारस ने महापुरुषों की जवानी पर प्रकाश डालते हुए राजस्थानी धरा की महिमा पर आधारित काव्य गीता का प्रस्तुतीकरण किया।

इस अवसर पर दिलीप सिंह जिलोला, ज्ञानेंद्र सिंह जिलोला, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नारायण सिंह राव, डॉ. रामानंद दाधीच, विश्व हिंदू परिषद प्रांत मंत्री कौशल गौड़, जयसिंहश्याम गोशाला समिति अध्यक्ष विष्णु गोपाल सोमानी, प्रताप सिंह मेहता, गंभीर सिंह राठौड़, प्रताप सिंह चुंडावत, राजस्थान गौसेवा समिति जिलाध्यक्ष जेठू सिंह राजपुरोहित, एसीबीईओ रामावतार मीणा, अशोक गेलड़ा, कैलाश चंद्र खटीक, विनोद कुमार शर्मा, खूबचंद झंवर सहित नगर के प्रबुद्धजन एवं संस्थान के पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मदन लाल पुरोहित ने किया। वीर पत्ता प्रतिमा स्थापना के एकादशम समारोह में धर्म, संस्कृति, इतिहास और शौर्य से जुड़े विचारों के माध्यम से नई पीढ़ी को प्रेरित करने का संदेश प्रमुख रूप से सामने आया।

Mubarik Ajnabi, Rajsamand

Mubarik Ajnabi, Rajsamand

नाम: मुबारिक-अजनबी

वर्तमान पद: प्रतिनिधि (प्रातःकाल, आमेट)

कार्यक्षेत्र: आमेट, जिला राजसमन्द (राजस्थान)

अनुभव: 25 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव

परिचय एवं कार्यक्षेत्र 

मुबारिक-अजनबी राजस्थान के राजसमन्द जिले के आमेट तहसील क्षेत्र के अनुभवी पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं। वह आमेट तहसील और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

बीट (मुख्य विषय)

  • विशेष कवरेज: आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।
  • नियमित कवरेज: स्थानीय राजनीति, प्रशासन, कानून-व्यवस्था, सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और जनहित से जुड़े अन्य मुद्दे।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

एम.ए. (M.A.) - कला स्नातकोत्तर की डिग्री।

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