आमेट: ढेलाणा स्कूल में गूंजा स्वदेशी का शंखनाद, स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती पर युवाओं ने लिया राष्ट्र निर्माण का संकल्प
राजसमंद के आमेट स्थित ढेलाणा विद्यालय में स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती पर राष्ट्रीय युवा दिवस धूमधाम से मनाया गया। प्रधानाचार्य संजू शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में 'रन फॉर स्वदेशी' और विभिन्न प्रतियोगिताओं के जरिए विद्यार्थियों ने आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लिया। तेजस्विनी शाकद्वीपीय सहित गणमान्य अतिथियों ने युवाओं को स्वदेशी और स्वावलंबन के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।

आमेट। नवभारत के निर्माण का संकल्प और स्वदेशी व स्वावलंबन की प्रखर भावना के साथ राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ढेलाणा में राष्ट्रीय युवा दिवस का भव्य आयोजन किया गया। स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती के अवसर पर आयोजित इस समारोह ने न केवल विद्यार्थियों में जोश भरा, बल्कि समाज को आत्मनिर्भरता का संदेश भी दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्रधानाचार्य संजू शर्मा ने की, जिन्होंने स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण कर समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। इस गौरवमयी अवसर पर भूगोल की स्वर्ण पदक विजेता तेजस्विनी शाकद्वीपीय और वरिष्ठ अध्यापक विजय सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, वहीं गजराज सिंह चारण और गिरिराज प्रजापत ने अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
युवा शक्ति को जागृत करने के उद्देश्य से विद्यालय परिसर में विभिन्न प्रतियोगिताओं की धूम रही। चित्रकला प्रतियोगिता में अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन करते हुए चेतना बैरागी ने प्रथम, पूजा ने द्वितीय और सोनू ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। निबंध लेखन के माध्यम से वैचारिक स्पष्टता दिखाते हुए ललित ने प्रथम, पंकज ने द्वितीय और योगेश ने तृतीय स्थान पर बाजी मारी। वहीं, भाषण प्रतियोगिता में अपनी ओजस्वी वाणी से कृष्णा ने प्रथम, मंजू ने द्वितीय और रवि ने तृतीय स्थान हासिल किया। इस अवसर पर शारीरिक शिक्षक मनोज कुमार शर्मा के कुशल निर्देशन में 'रन फॉर स्वदेशी' का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यालय के समस्त छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर स्वदेशी अपनाने का संदेश दिया।
समारोह को संबोधित करते हुए स्वर्ण पदक विजेता तेजस्विनी शाकद्वीपीय ने स्वामी विवेकानंद के स्वदेशी विचारों और आत्मनिर्भर भारत की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। वरिष्ठ अध्यापक विजय सिंह ने विद्यार्थियों को अनुशासन और स्वावलंबन को जीवन का आधार बनाने की सीख दी। कार्यक्रम के दौरान गजराज सिंह चारण ने विद्यार्थियों को स्वदेशी की शपथ दिलाते हुए इसे जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया, जबकि गिरिराज प्रजापत ने स्वदेशी आत्मनिर्भरता पर संवाद कर जन-जागरूकता फैलाने पर बल दिया। प्रधानाचार्य संजू शर्मा ने विजेताओं को प्रमाण पत्र वितरित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
समारोह की महत्ता को रेखांकित करते हुए नारायण लाल रेगर ने युवा की परिभाषा साझा की। उन्होंने कहा कि युवा वह है जो अनीति के विरुद्ध लड़े, दुर्गुणों से दूर रहे और जोश के साथ होश रखते हुए राष्ट्र के लिए बलिदान को तत्पर रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में गोपाल टेलर, चुन्नीलाल रेगर, लता शर्मा, मुकेश कुमार गूगड, मनोज कुमार शर्मा और जगदीश सिंह चुंडावत का विशेष सहयोग रहा। इस दौरान आनंद, देवेंद्र, गणपत, गोविंद, कमलेश, राहुल, राजू, अनिल, दिनेश, कोमल, कृष्णा, रवि और अनमोल सहित संपूर्ण विद्यालय परिवार उपस्थित रहा। कार्यक्रम संयोजक गजराज सिंह चारण ने बताया कि यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर स्वदेशी और स्वावलंबन के प्रति एक नई चेतना जगाने का सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ है।

Pratahkal Bureau
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