आमेट में तेरापंथ धर्म संघ ने मनाया 267 वां आचार्य भिक्षु अभिनिष्क्रमण दिवस
तेरापंथ सभा भवन में आयोजित कार्यक्रम में उपासक शांतिलाल छाजड़ और अन्य पदाधिकारियों ने आचार्य भिक्षु के जीवन दर्शन और धर्म संघ की स्थापना पर प्रकाश डाला।

राजसमंद के आमेट स्थित तेरापंथ सभा भवन में 267वें भिक्षु अभिनिष्क्रमण दिवस पर सामूहिक आराधना करते श्रावक-श्राविकाएं और उपस्थित पदाधिकारी।
आमेट, तेरापंथ सभा भवन में 267 वें भिक्षु अभिनिष्क्रमण दिवस का भव्य आयोजन किया गया। जेटीएन प्रतिनिधि पवन कच्छारा ने जानकारी दी कि कार्यक्रम का मंगल शुभारंभ सामायिक, ॐ भिक्षु जय भिक्षु, विघ्न हरण और नमस्कार महामंत्र के लयबद्ध जाप के साथ हुआ। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह द्वारा सामूहिक बाबा भिक्षु की आराधना की गई, जिसमें "जद-जद भिड पड़ी भगत पर तो स्वामी जी रो शरणों आडो आयो जियो" जैसी अनेकों भक्तिमय गीतिकाओं का भावपूर्ण संगान किया गया।
महापुरुषों का जीवन दर्शन और प्रेरणा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपासक शांतिलाल जी छाजड़ ने मुक्तक व कविता के माध्यम से कहा कि "महापुरुषों के जीवन से हमें जीवन जीने की कला प्राप्त होती है। प्रत्येक समस्या का समाधान मिलता है। कैसे जीवन जीना है उसका बोध होता है। महापुरुषों के जीवन के अनुभव ऐसे हैं कि उनके विचार जीवन की विपरीत परिस्थितियों में भी हमें आगे बढ़ने के लिए सदैव प्रेरित करते हैं।" उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि सूरज उगने के बाद अंधेरा टिकता नहीं, सत्य मिलने के बाद भ्रांतियां ठहरती नहीं। आचार्य भिक्षु ने जिस समय नया रास्ता लिया उनके साथ कोई आलोकदीप नहीं था।
जैन तेरापंथ धर्म संघ: एक वटवृक्ष
आज आचार्य श्री भिक्षु अभिनिष्क्रमण दिवस है। आज के दिन एक बीज को रोपा गया जो आज एक शतशाखी वटवृक्ष बन गया है, वह है- जैन तेरापंथ धर्म संघ। तेरापंथ सभा मंत्री मनोहर लाल जी पितलिया ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए इतिहास के पन्नों को साझा किया। उन्होंने बताया कि "आज ही के दिन स्वामी जी (आचार्य श्री भिक्षु) अभिनिष्क्रमण करके नगर से बाहर पहुंचे ही थे कि जोर से आंधी चलने लगी। तेज़ आंधी में विहार करना अकल्पनीय है। इसलिए वहीं पास-स्थित शमशान भूमि में बनी जैतसिंह जी की छत्री में ठहर गये।"
आचार्य श्री महाश्रमण जी का सुखसाता संदेश
तत्वज्ञान महेंद्र जी बोहरा ने लाडनूं में विराजित आचार्य श्री महाश्रमण जी व धवल सेना के सुखसाता संदेश को श्रावक-श्राविकाओं के बीच रखा। कार्यक्रम के अंत में उपासक जी ने मंगल पाठ सुनाया। इस धार्मिक आयोजन में श्रावक-श्राविकाओं व संस्था के सभी पदाधिकारियों की गरिमामयी और अच्छी उपस्थिति रही।

Mubarik Ajnabi, Rajsamand
नाम: मुबारिक-अजनबी
वर्तमान पद: प्रतिनिधि (प्रातःकाल, आमेट)
कार्यक्षेत्र: आमेट, जिला राजसमन्द (राजस्थान)
अनुभव: 25 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव
परिचय एवं कार्यक्षेत्र
मुबारिक-अजनबी राजस्थान के राजसमन्द जिले के आमेट तहसील क्षेत्र के अनुभवी पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं। वह आमेट तहसील और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
बीट (मुख्य विषय)
- विशेष कवरेज: आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।
- नियमित कवरेज: स्थानीय राजनीति, प्रशासन, कानून-व्यवस्था, सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और जनहित से जुड़े अन्य मुद्दे।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
एम.ए. (M.A.) - कला स्नातकोत्तर की डिग्री।
