आमेट: अपनों के बीच खुशियाँ तलाशते बुजुर्गों की आँखों में छलके आंसू, मैत्री वीरा ने वृद्धाश्रम में बांटी रसद सामग्री
आमेट के मोही वृद्धाश्रम में मैत्री वीरा और महावीर इंटरनेशनल द्वारा स्वर्गीय शंकर लाल डांगी की पुण्यतिथि पर सेवा कार्य का आयोजन किया गया। बुजुर्गों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि एकांत के बजाय आश्रम का सामूहिक जीवन उन्हें अधिक खुशी दे रहा है। संस्था ने रसद सामग्री वितरित कर बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया और भविष्य में भी सहयोग का आश्वासन दिया।

यहाँ मैत्री वीरा और महावीर इंटरनेशनल द्वारा मोही वृद्धाश्रम में आयोजित सेवा कार्य पर आधारित एक औपचारिक समाचार लेख है:
आमेट: अपनों के बीच खुशियाँ तलाशते बुजुर्गों की आँखों में छलके आंसू, मैत्री वीरा ने वृद्धाश्रम में बांटी रसद सामग्री
आमेट। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और पीढ़ीगत अंतराल के बीच अपनों से दूर हुए बुजुर्गों के लिए 'मैत्री वीरा' और 'महावीर इंटरनेशनल' खुशियों की एक नई किरण बनकर सामने आए हैं। आमेट के समीप मोही स्थित वृद्धाश्रम में सेवा और समर्पण का एक अनूठा दृश्य उस समय देखने को मिला, जब स्वर्गीय शंकर लाल डांगी की पांचवीं पुण्यतिथि के अवसर पर डांगी परिवार और मैत्री वीरा संस्था के सदस्य बुजुर्गों का हाल-चाल जानने पहुंचे। इस दौरान न केवल खाद्य सामग्री का वितरण किया गया, बल्कि संस्था के सदस्यों ने बुजुर्गों के साथ बैठकर उनके जीवन के संघर्षों और वर्तमान परिवेश पर लंबी चर्चा की, जिससे कई भावुक कर देने वाले अनुभव सामने आए।
कार्यक्रम के दौरान मैत्री वीरा की टीम ने बुजुर्गों के स्वास्थ्य और आश्रम की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। जब बुजुर्गों से उनके यहाँ रहने का कारण पूछा गया, तो वहां मौजूद वृद्धजनों ने बड़े ही मार्मिक ढंग से अपनी स्थिति बयां की। कुछ बुजुर्गों की आँखों में अपने अतीत को याद कर आंसू छलक आए, तो कुछ ने वर्तमान परिवेश में संतोष जताया। उन्होंने बताया कि घर की चारदीवारी में अकेलेपन और नई पीढ़ी की व्यस्तता के कारण वे खुद को उपेक्षित महसूस करते थे, लेकिन इस आश्रम में वे एक-दूसरे के साथ सुख-दुख साझा करते हुए, हंसते-गाते हुए अपना समय व्यतीत कर रहे हैं। बुजुर्गों के अनुसार, घर के एकांत से बेहतर यहाँ का सामूहिक वातावरण है, जहाँ वे अपनी पसंद से कार्य कर सकते हैं और खुलकर बात कर सकते हैं।
सेवा के इस पुनीत कार्य में डांगी परिवार ने स्वर्गीय शंकर लाल डांगी की स्मृति को नमन करते हुए आश्रम की आवश्यकताओं को पूरा करने का संकल्प दोहराया। मैत्री वीरा द्वारा आश्रम में दैनिक आवश्यकताओं से जुड़ी सामग्री भेंट की गई, जिसमें आटा, तेल, घी, दलिया, दालें, चावल, सूजी, पोहा, चीनी, गुड़ और ताजे फल शामिल थे। रसद सामग्री पाकर और अपनों जैसा स्नेह पाकर बुजुर्गों ने उपस्थित सभी सदस्यों को हृदय से आशीर्वाद दिया।
संस्था के पदाधिकारियों ने बुजुर्गों को आश्वस्त किया कि मैत्री वीरा संगठन नई और पुरानी पीढ़ी के बीच एक सेतु का कार्य कर रहा है। उन्होंने वृद्धजनों से वादा किया कि भविष्य में भी आश्रम की किसी भी आवश्यकता के लिए संस्था तत्पर रहेगी। आश्रम के कार्यकर्ताओं ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के युग में ऐसी संस्थाओं की नितांत आवश्यकता है जो बुजुर्गों के मान-सम्मान को सर्वोपरि रखते हुए उन्हें मुख्यधारा से जोड़े रखें। इस आयोजन ने समाज को यह संदेश दिया कि भौतिक सहायता से कहीं अधिक बुजुर्गों को हमारे समय और संवाद की आवश्यकता होती है।

Mubarik Ajnabi, Rajsamand
नाम: मुबारिक-अजनबी
वर्तमान पद: प्रतिनिधि (प्रातःकाल, आमेट)
कार्यक्षेत्र: आमेट, जिला राजसमन्द (राजस्थान)
अनुभव: 25 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव
परिचय एवं कार्यक्षेत्र
मुबारिक-अजनबी राजस्थान के राजसमन्द जिले के आमेट तहसील क्षेत्र के अनुभवी पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं। वह आमेट तहसील और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
बीट (मुख्य विषय)
- विशेष कवरेज: आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।
- नियमित कवरेज: स्थानीय राजनीति, प्रशासन, कानून-व्यवस्था, सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और जनहित से जुड़े अन्य मुद्दे।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
एम.ए. (M.A.) - कला स्नातकोत्तर की डिग्री।
