आमेट (राजसमंद)। आमेट उपखण्ड मुख्यालय पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जो कि क्षेत्र का एकमात्र बड़ा सरकारी अस्पताल है, इन दिनों उपचार के बजाय विवादों और अव्यवस्थाओं की सुर्खियों में बना हुआ है। अस्पताल की बदहाली और चिकित्सा कर्मियों की मनमानी से त्रस्त होकर सोमवार को नगरवासियों का सब्र आखिरकार टूट गया। बड़ी संख्या में एकत्रित हुए स्थानीय निवासियों ने उपखण्ड कार्यालय पहुंचकर उपखण्ड अधिकारी (एसडीएम) को एक ज्ञापन सौंपा और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।

ज्ञापन के माध्यम से नागरिकों ने बताया कि राजसमंद जिले के इस महत्वपूर्ण उप जिला चिकित्सालय में व्याप्त अनियमितताएं अब आम जनता के लिए जी का जंजाल बन चुकी हैं। अस्पताल में फैली गंदगी और कुप्रबंधन के बीच डॉक्टरों का मरीजों के प्रति व्यवहार भी संवेदनहीन बताया जा रहा है। आरोप है कि चिकित्सालय में स्टाफ के बीच आपसी खींचतान और लड़ाई-झगड़ों का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है, जिससे गरीब तबके के मरीजों को न केवल समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा, बल्कि उन्हें आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। चिकित्सालय में न तो पर्याप्त मेडिकल स्टाफ है और न ही नर्सिंग कर्मियों की उचित व्यवस्था।

सबसे गंभीर सवाल अस्पताल के बुनियादी ढांचे पर उठाए गए हैं। नगरवासियों ने सवाल किया कि आखिर अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर (OT) बंद क्यों है और इसे कब शुरू किया जाएगा? वर्तमान में लेबर रूम पुरानी और जर्जर बिल्डिंग में संचालित हो रहा है, जिससे जच्चा और बच्चा दोनों की जान को खतरा बना रहता है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से तीखे सवाल पूछे कि नई बिल्डिंग के नक्शे में ओटी और लेबर रूम की व्यवस्था क्यों नहीं रखी गई? साथ ही, नई बिल्डिंग के निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवालिया निशान लगाए गए हैं। हालत यह है कि महज दो महीनों के भीतर ही नई बिल्डिंग की टाइलें और ईंटें उखड़ने लगी हैं, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती हैं।

अस्पताल की अन्य सुविधाओं पर प्रकाश डालते हुए ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि पैथोलॉजी डॉक्टर होने के बावजूद ब्लड बैंक चालू नहीं है। एम्बुलेंस होने के बाद भी इमरजेंसी मरीजों को तुरंत रेफर कर दिया जाता है, जिससे उनकी जान जोखिम में रहती है। अस्पताल के भीतर जांच मशीनें और एक्स-रे मशीनें अक्सर खराब रहती हैं, जिसके कारण मरीजों को मजबूरी में निजी केंद्रों पर भारी शुल्क चुकाना पड़ता है। हैरानी की बात यह है कि दंत चिकित्सा की सुविधाएं अस्पताल में नगण्य हैं, जबकि संबंधित चिकित्सक अपने निजी क्लीनिकों पर सक्रिय हैं।

नगरवासियों ने प्रशासन को दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अगले सात दिनों के भीतर अस्पताल की इन तमाम समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया, तो कस्बे के लोग उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। न्याय न मिलने की स्थिति में अस्पताल के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की जाएगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान पुष्पेंद्र जांगिड़, प्रदीप सिंह राठौड़, मनीष मैवाड़ा, मनोज बुनकर, राजेश खटीक, पिंटू मेवाड़ा, जगदीश गवारिया, डालचन्द्र लखारा, गणपत सालवी, डूंगरसिंह, इकबाल मोहम्मद, गोवर्धन सिंह, गोपीलाल खटीक, ललित सिंह और लालसिंह सहित सैंकड़ों की संख्या में जागरूक नागरिक उपस्थित रहे।

Mubarik Ajnabi, Rajsamand

Mubarik Ajnabi, Rajsamand

नाम: मुबारिक-अजनबी

वर्तमान पद: प्रतिनिधि (प्रातःकाल, आमेट)

कार्यक्षेत्र: आमेट, जिला राजसमन्द (राजस्थान)

अनुभव: 25 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव

परिचय एवं कार्यक्षेत्र 

मुबारिक-अजनबी राजस्थान के राजसमन्द जिले के आमेट तहसील क्षेत्र के अनुभवी पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं। वह आमेट तहसील और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

बीट (मुख्य विषय)

  • विशेष कवरेज: आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।
  • नियमित कवरेज: स्थानीय राजनीति, प्रशासन, कानून-व्यवस्था, सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और जनहित से जुड़े अन्य मुद्दे।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

एम.ए. (M.A.) - कला स्नातकोत्तर की डिग्री।

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