आमेट। राजसमंद जिले के शैक्षणिक गलियारों में इस समय एक बड़ी हलचल महसूस की जा रही है। निजी विद्यालय संगठन अपनी जायज मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की पूरी तैयारी कर चुका है। आगामी 30 जनवरी को जिला मुख्यालय पर प्रस्तावित विशाल धरने और प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए संगठन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस आंदोलन को ऐतिहासिक बनाने के उद्देश्य से महेंद्र सिंह झाला के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई है, जो जिले के कोने-कोने में जाकर 'डोर टू डोर' जनसंपर्क अभियान चला रही है। यह अभियान केवल एक सूचना मात्र नहीं है, बल्कि निजी शिक्षण संस्थानों की एकजुटता और उनके अस्तित्व की लड़ाई का शंखनाद माना जा रहा है।

इस सघन जनसंपर्क अभियान की कमान संभालते हुए महेंद्र सिंह झाला के साथ जिले भर के प्रमुख शिक्षाविद् और संगठन के सक्रिय सदस्य मैदान में उतर चुके हैं। अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टीम में गिरिश श्रीमाली, मदन सिंह झाला, भुरी लाल गाडरी, नरेन्द्र सिंह झाला, जवान सिंह देवड़ा, चम्पालाल गाडरी, यशवन्त शर्मा, कृष्ण कान्त पुरोहीत, देवीलाल पालीवाल, चतरसिंह चौहान, शकिल मोहम्मद, अभिषेक पालीवाल, दीलिप जोशी, डॉ. गिरिश पालीवाल, भरत कुमावत, शिवशंकर पुर्बिया, विनोद व्यास, शिव प्रसाद सनाढ्य और कैलाश शर्मा सहित 40 से अधिक ऊर्जावान सदस्य शामिल हैं। ये सभी सदस्य जिले के प्रत्येक निजी विद्यालय तक पहुंचकर संचालकों और शिक्षकों को इस आंदोलन का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

अभियान के क्रम में आज टीम ने खमनोर और देलवाड़ा ब्लॉक का सघन दौरा किया। यहाँ टीम के सदस्यों ने स्थानीय विद्यालय संचालकों के साथ बैठकें कीं और प्रदर्शन के लिए आवश्यक संख्याबल जुटाने पर चर्चा की। संगठन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह धरना केवल विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि निजी शिक्षा क्षेत्र के सामने आ रही चुनौतियों के समाधान की एक पुरजोर मांग है। क्षेत्र के विद्यालयों से न केवल जनसमर्थन मिल रहा है, बल्कि आर्थिक और नैतिक सहयोग के लिए भी लोग आगे आ रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह निजी विद्यालयों के संगठित स्वरूप को दर्शाता है। 30 जनवरी का यह प्रदर्शन जिला प्रशासन और सरकार के लिए एक बड़ा संदेश होगा। जिस तरह से खमनोर और देलवाड़ा में टीम को भारी उत्साह देखने को मिला है, उससे यह स्पष्ट है कि आगामी दिनों में यह आंदोलन और भी तीव्र रूप धारण करेगा। संगठन के प्रत्येक सदस्य का लक्ष्य स्पष्ट है—निजी विद्यालयों के अधिकारों की रक्षा और उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण। अब सभी की निगाहें 30 जनवरी की उस तारीख पर टिकी हैं, जब राजसमंद की सड़कों पर निजी शिक्षा जगत का यह विशाल जनसैलाब अपनी आवाज बुलंद करेगा।

Pratahkal Bureau

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