आमेट में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य में बुधवार से पंचायत चुनाव का औपचारिक रूप से बिगुल बजने वाला है। इससे पहले ही आमेट उपखंड क्षेत्र के गांवों में सियासी तापमान बढ़ चुका है। 23 सितंबर को सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए होने वाली आरक्षण लॉटरी ने संभावित दावेदारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। किस पंचायत में सरपंच की सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी और किसके लिए चुनावी मैदान खुलेगा, इसे लेकर गांवों में अटकलों का दौर जारी है।

आमेट पंचायत समिति की 31 ग्राम पंचायतों में आरक्षण की तस्वीर सामने आते ही कई दावेदारों के राजनीतिक समीकरण बनेंगे, तो कई की चुनाव लड़ने की हसरतों पर पानी फिर सकता है। यही वजह है कि संभावित प्रत्याशी अभी से मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं। कोई सामाजिक बैठकों के जरिए संपर्क साध रहा है तो कोई पुराने रिश्तों की दुहाई दे रहा है। समर्थक भी अपने-अपने दावेदार के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हुए हैं।

लॉटरी से पहले ही गांवों में ‘कौन बनेगा सरपंच’ का खेल शुरू हो गया है। गांवों की चौपाल, चाय की थड़ी और प्रमुख चौराहे इन दिनों चुनावी चर्चाओं के नए अड्डे बन गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि किस पंचायत का सरपंच पद किस वर्ग के खाते में जाएगा। संभावित दावेदारों के समर्थक आरक्षण के संभावित गणित के साथ जातीय और सामाजिक समीकरणों को जोड़कर चुनावी संभावनाएं तलाश रहे हैं।

आरक्षण सामान्य रहा तो कौन मैदान में उतरेगा, महिला सीट हुई तो किसके परिवार से प्रत्याशी आएगा और ओबीसी अथवा जनजाति वर्ग के लिए सीट आरक्षित होने पर कौन मजबूत दावेदार हो सकता है, इन सवालों पर गांवों में लगातार मंथन चल रहा है।

परिसीमन ने पहले ही चुनाव का भूगोल बदल दिया है। इस बार परिसीमन के बाद चुनावी गणित पहले जैसी नहीं रही। कहीं वार्ड बढ़े हैं तो कहीं घटे हैं। कई स्थानों पर मतदाताओं के पंचायत क्षेत्र भी बदल गए हैं। इससे पुराने राजनीतिक समीकरण टूटे हैं और नए समीकरण बनने लगे हैं। जिन दावेदारों की पकड़ पहले किसी खास वार्ड या मतदाता समूह में मजबूत थी, उन्हें अब बदले क्षेत्र में नए सिरे से जमीन तैयार करनी पड़ रही है।

बुधवार की लॉटरी के बाद गांवों की राजनीति में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। आरक्षण तय होते ही संभावित उम्मीदवारों की सूची काफी हद तक साफ हो जाएगी। इसके बाद दावेदार खुलकर सामने आएंगे और समर्थन जुटाने, रिश्तों को साधने तथा मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद करने की कवायद तेज होगी।

फिलहाल हर दावेदार की नजर आज की तारीख पर है। आज निकलने वाली लॉटरी सिर्फ आरक्षण तय नहीं करेगी, बल्कि कई गांवों में अगले सरपंच की सियासी दौड़ का पहला बड़ा फैसला भी करेगी।

Updated On
Mubarik Ajnabi, Rajsamand

Mubarik Ajnabi, Rajsamand

नाम: मुबारिक-अजनबी

वर्तमान पद: प्रतिनिधि (प्रातःकाल, आमेट)

कार्यक्षेत्र: आमेट, जिला राजसमन्द (राजस्थान)

अनुभव: 25 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव

परिचय एवं कार्यक्षेत्र 

मुबारिक-अजनबी राजस्थान के राजसमन्द जिले के आमेट तहसील क्षेत्र के अनुभवी पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं। वह आमेट तहसील और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

बीट (मुख्य विषय)

  • विशेष कवरेज: आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।
  • नियमित कवरेज: स्थानीय राजनीति, प्रशासन, कानून-व्यवस्था, सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और जनहित से जुड़े अन्य मुद्दे।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

एम.ए. (M.A.) - कला स्नातकोत्तर की डिग्री।

Next Story