आमेट में मोहर्रम का ऐतिहासिक जुलूस, अकीदत के साथ निकली ताजिया
आमेट नगर में हजरत इमाम हसन-हुसैन की शहादत की याद में मोहर्रम का जुलूस निकाला गया। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अकीदत और पूरे जोश के साथ भाग लिया।

आमेट की तंग गलियों में मोहर्रम के मौके पर निकाला गया पारंपरिक ताजिया जुलूस, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए।
आमेट। हजरत इमाम हसन-हुसैन की शहादत की याद में शुक्रवार को आमेट नगर में मोहर्रम का ऐतिहासिक जुलूस बेहद गरिमामय और पारंपरिक तरीके से निकाला गया। अकीदत, अटूट आस्था और पूरे जोश-खरोश के साथ निकले इस जुलूस के दौरान पूरा माहौल ‘या हुसैन, या हुसैन’ के नारों और ढोल-ताशों की गूंजती थाप से सराबोर हो गया। कर्बला के शहीदों की याद में डूबे इस धार्मिक आयोजन को लेकर स्थानीय सहित आसपास के क्षेत्रों के निवासियों में भारी उत्साह देखने को मिला।
यह ऐतिहासिक जुलूस सुबह करीब 11 बजे नगर के मध्य हुसैनी चौक स्थित इमामबाड़े से रस्मी सलामी के साथ प्रारंभ हुआ। इसके बाद जुलूस पूरी भव्यता के साथ नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। ढोल और ताशों की मातमी धुन के बीच यह कारवां हुसैन चौक से शुरू होकर तकिया रोड, होलीथान, बड़ीपोल, नाइयों का पावटिया, हजरत सैय्यद गुलाब शाह की दरगाह, नदी दरवाजा, सोनारों का मोहल्ला, भोलीखेडा हवेली, चंदू बावड़ी, मारू दरवाजा और बाहर के अखाड़े जैसे मुख्य रास्तों से गुजरा। मातमी धुन के साथ शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ता यह जुलूस शाम को चंद्रभागा नदी तट स्थित कर्बला शरीफ पहुंचकर संपन्न हुआ।
इस पूरे सफर के दौरान कौमी एकता और अटूट आस्था का अनूठा मंजर दिखाई दिया। जुलूस के मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा के साथ खारक, नोट और खोपरे के सेवरे चढ़ाकर अपने परिवार की खुशहाली और अमन-चैन के लिए दुआएं मांगीं। वहीं, अकीदतमंदों द्वारा जगह-जगह शर्बत व ठंडे पेयजल की बेहतरीन व्यवस्था की गई। जुलूस के दौरान होलीथान व मारू दरवाजा बाहर हुसैनी कमेटी के पहलवानों द्वारा अखाड़ेबाजी के हैरतअंगेज करतब भी दिखाए गए।
इस पवित्र और ऐतिहासिक मौके पर मुस्लिम समुदाय के नगरपालिका के निवर्तमान उपाध्यक्ष हाजी मीरू खांन मंसुरी, हाजी फकीर मोहम्मद छिपा, जहूर हुसैन शोरघर, फकीर मोहम्मद चाबुकसवार, हाजी मोहम्मद शेख, हाजी अत्ता मोहम्मद शेख, तुफैल अहमद उस्ता, अस्लम उस्ता, आजाद मंसूरी, ताहिर शौरघर, अल्ताफ खांन पठान, अब्दुल रहमान उस्ता, अमीर मोहम्मद शौरघर, इमरान शाह, जाफर खांन फौजदार, फिरोज शेख़, आजाद शाह, लाला भाई शेख, लाला भाई मंसूरी, मोहम्मद उमर रंगसाज, हाजी मुबारिक-हुसैन मंसूरी, मुश्ताक शाह, मुबारिक चाबूकसवार, इकबाल, ईशाक उस्ता, शाहरुख पठान, हमीद बैंग, छीपा, अली मोहम्मद मंसूरी, सद्दाम हुसैन मंसूरी, मैराज बैग, रईश बैंग, अशरद हुसैन और शब्बीर हुसैन सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ बुजुर्गों, प्रबुद्ध जनों और युवाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित और अनुशासित बनाए रखने में अपनी अहम भूमिका निभाई।

Mubarik Ajnabi, Rajsamand
नाम: मुबारिक-अजनबी
वर्तमान पद: प्रतिनिधि (प्रातःकाल, आमेट)
कार्यक्षेत्र: आमेट, जिला राजसमन्द (राजस्थान)
अनुभव: 25 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव
परिचय एवं कार्यक्षेत्र
मुबारिक-अजनबी राजस्थान के राजसमन्द जिले के आमेट तहसील क्षेत्र के अनुभवी पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं। वह आमेट तहसील और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
बीट (मुख्य विषय)
- विशेष कवरेज: आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।
- नियमित कवरेज: स्थानीय राजनीति, प्रशासन, कानून-व्यवस्था, सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और जनहित से जुड़े अन्य मुद्दे।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
एम.ए. (M.A.) - कला स्नातकोत्तर की डिग्री।
