आमेट: आस्था के सैलाब के साथ संपन्न हुई भगवान बद्रीविशाल की वर्षगांठ, जयकारों से गूंज उठी धर्मनगरी
आमेट के मातृकुंडिया में चार चोखला घाणिवाला तेली समाज द्वारा भगवान बद्रीविशाल मंदिर की वार्षिक वर्षगांठ धूमधाम से मनाई गई। भव्य भजन संध्या, शोभायात्रा और ध्वजारोहण के साथ संपन्न हुए इस कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठ जनों ने शिरकत की। श्रद्धा और उल्लास से सराबोर इस आयोजन की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

आमेट। मेवाड़ की पावन धरा पर स्थित मातृकुंडिया धाम में जब आस्था और परंपरा का संगम हुआ, तो दृश्य अलौकिक हो उठा। चार चोखला घाणिवाला तेली समाज द्वारा आयोजित भगवान बद्रीविशाल मंदिर की वार्षिक वर्षगांठ इस बार न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का केंद्र बनी, बल्कि समाज की एकजुटता और अटूट श्रद्धा का जीवंत उदाहरण पेश किया। भक्ति की बयार और भगवान के प्रति समर्पण के बीच इस भव्य उत्सव ने पूरे क्षेत्र को धर्ममय कर दिया, जिसकी गूंज अब चहुंओर सुनाई दे रही है।
उत्सव का श्रीगणेश वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर आयोजित एक विशाल भजन संध्या से हुआ। रात्रि के सन्नाटे को चीरती प्रभु बद्रीविशाल की महिमा के स्वर जब गूंजे, तो पूरा पांडाल भक्ति रस में सराबोर हो गया। समाज जनों ने पूरी तन्मयता और मनोयोग के साथ भजनों का आनंद लिया, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया। पूरी रात चले इस जागरण के बाद, ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर परिसर एक नई ऊर्जा से लबरेज नजर आया।
सुबह की पहली किरण के साथ ही गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों की थाप पर भगवान बद्रीविशाल की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान उत्सव का उल्लास चरम पर था; जहां युवा थिरक रहे थे, वहीं समाज की महिलाओं ने पारंपरिक नृत्य कर इस शोभायात्रा में चार चांद लगा दिए। शोभायात्रा के पश्चात शुभ मुहूर्त की शुभ वेला में, गगनभेदी जयकारों के बीच मंदिर के शिखर पर नई ध्वजा चढ़ाई गई। यह दृश्य इतना मनोरम था कि वहां उपस्थित हर भक्त की आंखें श्रद्धा से नम हो गईं।
इस गरिमामयी आयोजन में चारों चोखला के तेली समाज की उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया। समारोह के दौरान समाज के वरिष्ठ जनों और गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी मौजूदगी रही, जिनमें बद्री विशाल मंदिर के पूर्व अध्यक्ष लाला राम पंचोली, वर्तमान अध्यक्ष भेरुलाल जी, कोषाध्यक्ष रोशन जी, मांगीलाल सिंडारडा, बंसी लाल पंचोली राज्यावास, शंकर जडोल, रमेश अजमेरा गिलुंड, प्रकाश गुलानिया मादडी, श्याम अमलोई, रोडी लाल, पंचलोडिया राजनगर, गोपाल अध्यापक सियाणा आमेट, प्रहलाद बामन टुकड़ा, कन्हैयालाल दौवड़ा और माताजी सहित कई प्रतिष्ठित व्यक्ति सम्मिलित हुए। इन सभी ने भगवान के चरणों में शीश नवाकर समाज की खुशहाली की कामना की।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं था, बल्कि इसने सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का एक सशक्त संदेश दिया। अंततः, सामूहिक भोज और प्रसादी के वितरण के साथ इस भव्य वर्षगांठ महोत्सव का समापन हुआ, जो अपनी भव्यता और भक्ति के लिए लंबे समय तक याद किया जाएगा।

