आमेट: जल संरक्षण पर आधारित पुस्तक 'जल ही जीवन है' का विमोचन और अभिनंदन
साकेत साहित्य संस्थान और जलदाय विभाग की पहल पर प्रकाशित पुस्तक की एसडीएम गोविन्द सिंह रतनू ने प्रशंसा की; इसे जल जागरूकता में मील का पत्थर बताया।

आमेट। राजस्थान के राजसमंद जिले के अंतर्गत आमेट उपखंड मुख्यालय पर जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण साहित्यिक पहल की गई है। साकेत साहित्य संस्थान राजसमंद एवं जलदाय विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चलाए जा रहे 'जल बचाओ अभियान' के तहत प्रकाशित विशिष्ट पुस्तक 'जल ही जीवन है' की प्रशासनिक स्तर पर उच्च सराहना की गई है। साकेत साहित्य संस्थान राजसमंद के जिला उपाध्यक्ष नारायण सिंह राव एवं आमेट तहसील अध्यक्ष मुकेश वैष्णव के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने आमेट उपखंड अधिकारी गोविन्द सिंह रतनू से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान एसडीएम रतनू का ईकलाई पहनाकर आत्मीय अभिनंदन किया गया और उन्हें 'जल ही जीवन है' पुस्तक की प्रति भेंट की गई।
पुस्तक का सूक्ष्मता से अवलोकन करने के पश्चात उपखंड अधिकारी गोविन्द सिंह रतनू ने कहा कि यह कृति जल बचाओ अभियान में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने संस्थान के साहित्यकारों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि पुस्तक में संकलित प्रेरक रचनाएं और जन-जागरूकता हेतु लिखे गए स्लोगन जल संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करने में अत्यंत सराहनीय भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम के दौरान संस्थान के संस्थापक व जिला उपाध्यक्ष नारायण सिंह राव ने साकेत साहित्य संस्थान द्वारा अब तक विमोचित की गई 31 पुस्तकों के विस्तृत सफर और उनके उद्देश्यों की जानकारी साझा की। वहीं, तहसील अध्यक्ष मुकेश वैष्णव ने संस्थान द्वारा संचालित जन-चेतना एवं समाज सेवा के विभिन्न कार्यों में सक्रिय सहभागिता पर प्रकाश डाला।
इस गरिमामयी अवसर पर प्रशासनिक एवं विभागीय अधिकारियों की व्यापक उपस्थिति रही, जिनमें तहसीलदार पारसमल बुनकर, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नारायण सिंह राव, जलदाय विभाग के अभियंता कुलदीप सिंह बोर्हट, अतिरिक्त विकास अधिकारी घनश्याम सिंह राव, ब्लॉक सीएमएचओ डॉ. रामप्रसाद लोमरोड, सांख्यिकी अधिकारी दिग्पाल सिंह चुण्डावत तथा जेआरए चिराग आशिया प्रमुख रूप से शामिल थे। इनके अतिरिक्त नगरपालिका के वरिष्ठ लिपिक श्रीपाल पारीक, बलवंत सिंह राठौड़, रवि श्रोत्रिय, उमेश कुमार, नर्बदा टेलर, नरेंद्र सिंह और मनीष साहू सहित कई अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल साहित्यिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व के निर्वहन की दिशा में भी एक सशक्त संदेश देता है कि शब्दों की शक्ति से जल संरक्षण जैसे गंभीर विषय पर जन-आंदोलन खड़ा किया जा सकता है।

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