आमेट में डिजिटल सखी परियोजना के तहत ‘सखी उत्सव’ का भव्य आयोजन
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर राजसमंद, उदयपुर और चित्तौड़गढ़ की 250 महिलाओं ने डिजिटल सशक्तिकरण, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता के संकल्प के साथ भाग लिया।

आमेट में आयोजित सखी उत्सव के दौरान उपस्थित मुख्य अतिथि डॉ. बसंतीलाल बाबेल, विशिष्ट अतिथिगण और मंजरी फाउंडेशन की टीम के साथ प्रतिभागी महिलाएं।
आमेट। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में डिजिटल सखी परियोजना के अंतर्गत आमेट में “सखी उत्सव” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राजसमंद, उदयपुर और चित्तौड़गढ़ क्षेत्र से लगभग 100 डिजिटल सखियों सहित महिला उद्यमियों एवं स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की दीदियों को मिलाकर करीब 250 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल सशक्तिकरण, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करना रहा।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और कौशल प्रदर्शन
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की प्रतिभा और उत्साह देखने को मिला। यहाँ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, लोकगीतों एवं विभिन्न खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया जिनमें महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इन गतिविधियों ने कार्यक्रम को उत्सवमय वातावरण प्रदान किया। साथ ही महिला उद्यमियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की आकर्षक स्टॉल भी लगाई गईं जिनमें हस्तनिर्मित वस्तुएं, घरेलू उत्पाद और स्थानीय कला से जुड़े सामान प्रदर्शित किए गए। इन स्टॉल के माध्यम से महिलाओं के कौशल, रचनात्मकता और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिला।
विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और प्रेरणा
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध लेखक एवं विशेषज्ञ डॉ. बसंतीलाल बाबेल (राष्ट्रभाषा कोविद, हिन्दी भाषा भूषण, पूर्व न्यायाधीश एवं शासन उपसचिव, गृह (विधि), राजस्थान सरकार) उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में महिलाओं को शिक्षा, डिजिटल तकनीक और स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि "ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का सशक्त होना समाज और देश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।" इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में नारायण सिंह राव (मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी), श्रीमती राजेश कुमारी (स्त्री रोग विशेषज्ञ), श्रीमती सरिता (कार्यक्रम अधिकारी), अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह चुण्डावत (अध्यक्ष, बार एसोसिएशन आमेट) तथा सेल्फ डिफेंस टीम के सदस्य भी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने महिलाओं को स्वास्थ्य, शिक्षा, कानूनी जागरूकता और आत्मरक्षा के महत्व पर मार्गदर्शन प्रदान किया।
'मन की बात' और सफलता के अनुभव
कार्यक्रम के दौरान आयोजित “मन की बात” सत्र विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस सत्र में डिजिटल सखियों और महिला प्रतिभागियों ने अपने अनुभव, संघर्ष और सफलता की कहानियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि "डिजिटल सखी परियोजना से जुड़कर उन्हें नई पहचान, आत्मविश्वास और आर्थिक सशक्तिकरण के अवसर प्राप्त हुए हैं।" इस आयोजन में मंजरी फाउंडेशन के प्रोग्राम डायरेक्टर नरेश नैन, सत्यनारायण सहित मंजरी टीम के सभी सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम के सहयोग और समन्वय से कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन और समापन हुआ।
सशक्तिकरण की ओर बढ़ते कदम
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण महिलाओं को आगे बढ़ने और समाज में अपनी मजबूत पहचान बनाने के लिए प्रेरित करते हैं। सखी उत्सव ने महिलाओं के आत्मविश्वास, सहयोग और सामूहिक शक्ति को एक मंच पर लाने का सफल प्रयास किया।

Pratahkal Bureau
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