आमेट में अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में केमिस्टों ने दिया ज्ञापन
राजसमंद के आमेट में दवा विक्रेताओं ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल कर अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने के लिए एसडीएम को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

राजसमंद जिले के आमेट में बुधवार को अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में हड़ताल के दौरान एसडीएम को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते केमिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी।
राजसमंद जिले के आमेट में अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री और जनस्वास्थ्य पर मंडरा रहे गंभीर खतरे के विरोध में बुधवार को नगर के दवा विक्रेताओं ने अपने प्रतिष्ठान बंद रख एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। राजसमंद जिला केमिस्ट एसोसिएशन शाखा आमेट के तत्वावधान में दवा विक्रेताओं ने आमेट एसडीएम को प्रधानमंत्री Narendra Modi के नाम ज्ञापन सौंपकर अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री पर तत्काल प्रभाव से कठोर कार्रवाई की मांग उठाई।
ज्ञापन सौंपने वालों में डॉ. रामानंद दाधीच, अनिल मुण्डोत, हेमंत भंडारी, दीपेन, विकास खटोड़, सुरेश, हरीसिंह और लोकेश सहित नगर के अनेक दवा विक्रेता शामिल रहे। ज्ञापन में बताया गया कि 20 मई 2026 को सभी दवा दुकानों को बंद रख विरोध दर्ज कराया गया। दवा विक्रेताओं ने कहा कि लंबे समय से संबंधित प्राधिकरणों को लगातार निवेदन और आग्रह करने के बावजूद इंटरनेट के माध्यम से हो रही अवैध दवा बिक्री पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते देशभर के लाखों केमिस्ट और दवा विक्रेताओं में गहरा असंतोष व्याप्त है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स तथा राजस्थान राज्य केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के आह्वान पर राजसमंद जिले के सभी केमिस्ट और दवा विक्रेताओं ने संयुक्त एवं सर्वसम्मति से इस आंदोलन में भाग लिया। दवा विक्रेताओं ने स्थानीय प्रशासन और शासन का ध्यान जनस्वास्थ्य तथा मरीजों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि बिना किसी स्पष्ट वैधानिक प्रावधान के ऑनलाइन माध्यम से दवाओं की बिक्री, फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन, बिना वैध चिकित्सकीय परामर्श के घर-घर दवा वितरण तथा अत्यधिक छूट और प्रीडेटरी प्राइसिंग जैसी गतिविधियां करोड़ों मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं।
ज्ञापन में कहा गया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 तथा नियम 1945 में ऑनलाइन दवा बिक्री का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं होने के बावजूद विभिन्न ऑनलाइन कंपनियां वर्षों से दवाओं की बिक्री कर रही हैं। वर्ष 2018 में केवल जनमत आमंत्रित करने के उद्देश्य से जारी अधिसूचना GSR 817 (E) को अब अप्रासंगिक और निरर्थक बताया गया। वहीं कोविड महामारी जैसी असाधारण परिस्थितियों में जारी GSR 220 (E), जिसकी आवश्यकता केवल आपातकालीन समय में थी, उसका वर्तमान सामान्य परिस्थितियों में विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और क्विक कॉमर्स कंपनियों द्वारा अनियंत्रित होम डिलीवरी के लिए दुरुपयोग किए जाने का आरोप लगाया गया।
दवा विक्रेताओं ने ज्ञापन में कहा कि इन सभी विषयों को समय-समय पर प्रमाण सहित केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष प्रस्तुत किया गया, लेकिन अवैध गतिविधियों को स्वीकार किए जाने के बावजूद कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने मांग की कि अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री के विरुद्ध तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाए, बिना वैध एवं सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की बिक्री और होम डिलीवरी पूर्णतः प्रतिबंधित की जाए, GSR 817 (E) और GSR 220 (E) को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा अपनाई जा रही अत्यधिक छूट और प्रीडेटरी प्राइसिंग नीति पर रोक लगाई जाए।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि देशभर के केमिस्ट और दवा विक्रेता सदैव स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था और औषधि आपूर्ति तंत्र की मजबूत रीढ़ रहे हैं। कोविड महामारी जैसे कठिन दौर में भी दवा व्यापारियों ने पूरे देश में निर्बाध दवा आपूर्ति सुनिश्चित कर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। दवा विक्रेताओं ने जनहित, जनस्वास्थ्य और मरीजों की सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।

Pratahkal Bureau
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