आमेट। वोराट क्षेत्र की पावन धरा और नेशनल हाईवे नंबर 8 पर स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल दुर्गाकुंड मंदिर में घाणीवाल तेली समाज द्वारा आयोजित वार्षिक उत्सव और ध्वजारोहण कार्यक्रम श्रद्धा और उल्लास के संगम के साथ संपन्न हुआ। 8 जनवरी 2026 की पावन तिथि पर आयोजित इस महोत्सव में भगवान भोलेनाथ और संत श्री राजूराम जी महाराज के जयकारों से संपूर्ण वातावरण गुंजायमान हो उठा, जिससे न केवल क्षेत्र की धार्मिक छटा बिखरी बल्कि सनातन धर्म की जड़ों को और अधिक मजबूती मिली।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मंदिर शिखर पर नवीन ध्वजा का आरोहण रहा। परंपराओं का निर्वहन करते हुए भगवान भोलेनाथ के मंदिर पर ध्वजा चढ़ाने का सौभाग्य चारभुजा के बंदवाल परिवार को प्राप्त हुआ, वहीं संत शिरोमणि राजूराम जी महाराज के मंदिर पर धानिन परिवार द्वारा पूर्ण विधि-विधान के साथ ध्वजा फहराई गई। आस्था के इस पर्व में महिलाओं की सहभागिता ने चार चांद लगा दिए; पारंपरिक मंगल गीतों और भजनों के स्वर लहरियों ने सांस्कृतिक परिपाटी को जीवंत कर दिया। रात्रि में आयोजित विशाल भजन संध्या में गायक कलाकारों ने जब भक्ति रस घोला, तो श्रद्धालु स्वयं को रोक नहीं पाए और भगवान भोलेनाथ एवं राजूराम जी महाराज के भजनों पर मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे।

आयोजन की सफलता में दुर्गाकुंड मंदिर मंडल के अध्यक्ष लक्ष्मण हांडा और उनकी पूरी कार्यकारिणी का विशेष योगदान रहा। समारोह के दौरान समाज की एकजुटता देखते ही बनी, जहाँ वरिष्ठ सदस्यों का सम्मान कर सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया। इस गरिमामयी अवसर पर तेली समाज के जिला अध्यक्ष चुन्नीलाल पंचोली, बंसीलाल पंचोली, रोशन चारभुजा, रजनीकांत कांकरोली, शंकरलाल झडोल, भैरूलाल माड का खेडा, उदयलाल गिरडिया, चुन्नीलाल सरदारगढ़, वदन सियाणा, मोहन रिछेड, भंवर टाडावाड़ा, श्याम अमलोई, नारायणलाल दांतडा, देवीलाल जनावद और कालुराम टुंगच सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

अतिथियों का स्वागत और संपूर्ण व्यवस्थाओं का प्रबंधन कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्यों प्रकाश, मुकेश, प्रकाश (अन्य), लक्ष्मण, ख्याली लाल एवं गोपाल द्वारा अत्यंत आत्मीयता से किया गया। महाआरती के पश्चात समाज के हजारों श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। दुर्गाकुंड मंदिर कार्यकारिणी के प्रवक्ता और अध्यापक गोपाल साहू (सियाणा) ने बताया कि यह वार्षिक आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज की अटूट आस्था और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का एक सशक्त माध्यम है। इस सफल आयोजन ने एक बार फिर आमेट और वोराट क्षेत्र में दुर्गाकुंड मंदिर की महत्ता को रेखांकित किया है।

Mubarik Ajnabi, Rajsamand

Mubarik Ajnabi, Rajsamand

नाम: मुबारिक-अजनबी

वर्तमान पद: प्रतिनिधि (प्रातःकाल, आमेट)

कार्यक्षेत्र: आमेट, जिला राजसमन्द (राजस्थान)

अनुभव: 25 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव

परिचय एवं कार्यक्षेत्र 

मुबारिक-अजनबी राजस्थान के राजसमन्द जिले के आमेट तहसील क्षेत्र के अनुभवी पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं। वह आमेट तहसील और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

बीट (मुख्य विषय)

  • विशेष कवरेज: आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।
  • नियमित कवरेज: स्थानीय राजनीति, प्रशासन, कानून-व्यवस्था, सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और जनहित से जुड़े अन्य मुद्दे।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

एम.ए. (M.A.) - कला स्नातकोत्तर की डिग्री।

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