आमेट: युवाओं में जगा राष्ट्रप्रेम का जज्बा, श्री हीरालाल देवपुरा कॉलेज में गूंजा 'कर्तव्य बोध' का शंखनाद
आमेट के श्री हीरालाल देवपुरा राजकीय महाविद्यालय में 'कर्तव्य बोध दिवस' का भव्य आयोजन किया गया। मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नारायण सिंह राव और प्राचार्य रामकेश मीणा ने विद्यार्थियों को अनुशासन, राष्ट्र सेवा और ईमानदारी का संकल्प दिलाया। जानिए कैसे इस आयोजन ने युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण के प्रति एक नई चेतना जागृत की है।

आमेट। किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके नागरिकों के अधिकारों से नहीं, बल्कि उनके कर्तव्यों की निष्ठा से तय होती है। इसी महान विचार को ध्येय मानकर आमेट स्थित श्री हीरालाल देवपुरा राजकीय महाविद्यालय में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा) की स्थानीय इकाई द्वारा 'कर्तव्य बोध दिवस' का भव्य और अनुशासित आयोजन किया गया। यह आयोजन मात्र एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं के मानस पटल पर राष्ट्रवाद, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की अमिट छाप छोड़ने वाला एक बौद्धिक अनुष्ठान सिद्ध हुआ। कार्यक्रम के दौरान पूरा परिसर देशप्रेम और कर्तव्यनिष्ठा के संकल्प से सराबोर नजर आया।
इस गरिमामयी कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजसमंद के सह सचिव एवं हिंदी विभाग के सहायक आचार्य श्री कैलाश चन्द्र खटीक ने की। समारोह के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में आमेट के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी श्री नारायण सिंह राव उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने ओजस्वी विचारों से विद्यार्थियों में नई ऊर्जा का संचार किया। वहीं, विशिष्ट अतिथि के रूप में महाविद्यालय के प्राचार्य श्री रामकेश मीणा ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
मुख्य वक्ता श्री नारायण सिंह राव ने अपने संबोधन में एक अत्यंत गंभीर बिंदु की ओर ध्यानाकर्षण करते हुए कहा कि आज के युग में लोग अधिकारों की बात तो मुखरता से करते हैं, लेकिन कर्तव्य बोध के बिना अधिकारों की कल्पना पूरी तरह अधूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि ईमानदारी, अनुशासन और परिश्रम ही वह कुंजी है, जो उन्हें एक साधारण छात्र से महान राष्ट्रनायक की श्रेणी में खड़ा कर सकती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे महान विभूतियों के आदर्शों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।
विशिष्ट अतिथि प्राचार्य श्री रामकेश मीणा ने शिक्षा की व्यापक परिभाषा को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि डिग्री प्राप्त करना शिक्षा का अंतिम पड़ाव नहीं है। शिक्षा का वास्तविक मर्म एक जिम्मेदार, संवेदनशील और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक का निर्माण करना है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए सदैव तत्पर रहें। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री कैलाश चन्द्र खटीक ने सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता पर बल देते हुए कहा कि कर्तव्य पालन ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी मजबूती है। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से रामायण के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन मूल्यों को आत्मसात् करने की अपील की।
कार्यक्रम का कुशल और प्रभावी संचालन अर्थशास्त्र के सहायक आचार्य डॉ. भरत सिंह राव द्वारा किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में विवेक और आत्म-अनुशासन को चरित्र निर्माण का आधार बताया। इस बौद्धिक समागम में संकाय सदस्य श्रीमती रामेश्वरी, हिमांशु शर्मा, नरेन्द्र सिंह तंवर, योगेश कुमार, कैलाश बुनकर और डॉ. आस्था महरिया सहित मंत्रालयी कर्मचारी राजकुमार वर्मा, अशरफ रंगसाज एवं लालसिंह ने भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित जनों ने पूरी निष्ठा के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का सामूहिक संकल्प लिया, जो इस आयोजन की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण बना।

Pratahkal Bureau
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