रायपुर (भीलवाड़ा)। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के रायपुर थाना क्षेत्र के कोशिथल गांव में न्याय की गुहार लगाती एक बुजुर्ग महिला और उसका विकलांग पुत्र इन दिनों असहाय होकर दर-दर भटक रहे हैं। आरोप है कि पुलिस और स्थानीय पूंजीपति के गठजोड़ के कारण यह परिवार अपनी ही पैतृक जमीन से बेदखल किए जाने के खतरे से जूझ रहा है। मामला अब न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि कानून व्यवस्था की निष्पक्षता पर भी गंभीर शंका उत्पन्न कर रहा है।

तुलसीदेवी नामक यह बुजुर्ग महिला पिछले कई महीनों से अपने घर और जमीन को बचाने के लिए संघर्षरत हैं। उन्होंने बताया कि स्थानीय पूंजीपति रमेश टांक ने उनकी जमीन पर कब्जा करने की नीयत से लगातार धमकियां दीं और परेशान किया। तुलसीदेवी का कहना है कि उनके प्लॉट पर न्यायालय से स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) होने के बावजूद रमेश टांक ने जबरन ताला लगाकर कब्जे की कोशिश की। “हम पिछले पचास वर्षों से इस जमीन पर रह रहे हैं, पर अब हमें जबरन हटाया जा रहा है,” उन्होंने आंसू भरी आंखों से कहा।

तुलसीदेवी के विकलांग पुत्र ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं कि रायपुर थाना अधिकारी अर्जुन लाल गुर्जर पूंजीपति पक्ष के साथ मिलकर परिवार पर झूठे मुकदमे दर्ज करवा रहे हैं। उनका कहना है कि परिवार को धमकी भरे फोन कॉल्स भी मिले हैं, जिनकी रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है। परिवार ने कई बार पुलिस अधीक्षक और जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई, परंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। “सुनवाई न होने के कारण हमें आत्मदाह जैसा कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ सकता है,” तुलसीदेवी ने दर्दभरे स्वर में कहा।

परिवार का आरोप है कि उनके घर पर पहले भी हमला किया गया था, जिसमें उनकी गर्भवती बहू के साथ मारपीट हुई, लेकिन पुलिस ने न केवल एफआईआर दर्ज करने से इंकार किया बल्कि उल्टा परिवार के ही सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया। उन्होंने बताया कि पूंजीपति पक्ष द्वारा आए दिन गाली-गलौज, पत्थरबाजी और धमकियां दी जाती हैं, जिससे परिवार भय के साये में जी रहा है। यहां तक कि वे अपने घर में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगवा पा रहे हैं क्योंकि विरोध और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।

रमेश टांक का पक्ष

आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए रमेश टांक ने कहा कि उन्होंने यह जमीन लगभग आठ वर्ष पहले चेक और स्टांप पेपर पर खरीदी थी। उन्होंने बताया कि वे इस स्थान पर भेरुजी बावजी का धार्मिक स्थल बनवाने की तैयारी में हैं और उन्होंने किसी भी प्रकार की अवैध कार्रवाई नहीं की है। उल्टा उनके पिता के साथ मारपीट की गई, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं।

थाना अधिकारी का पक्ष

थाना अधिकारी अर्जुन लाल गुर्जर ने आरोपों से इंकार करते हुए कहा कि पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई कर रही है। दोनों पक्षों की शिकायतें दर्ज कर ली गई हैं और मामले की जांच निष्पक्ष रूप से जारी है।

फिर भी सवाल यही उठता है — जब एक बुजुर्ग महिला और उसका विकलांग पुत्र अपनी जमीन की रक्षा के लिए वर्षों से थाने-कचहरी के चक्कर काट रहे हों और पुलिस व्यवस्था उन तक न्याय नहीं पहुंचा पा रही हो, तो क्या वास्तव में कानून सबके लिए समान है? भीलवाड़ा की इस घटना ने प्रशासनिक निष्पक्षता और न्याय व्यवस्था पर गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

Pratahkal Bureau

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