वर्षों पुरानी सामाजिक धरोहर समाज को समर्पित, अनिल आचार्य ने सौंपी भूमि की मूल रजिस्ट्री
राजसमंद के कोठारिया में अनिल कुमार आचार्य ने समाज की भूमि की मूल रजिस्ट्री नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को सौंपकर वर्षों पुरानी सामाजिक धरोहर समाज को समर्पित की।

राजसमंद के कोठारिया स्थित भेरूजी मंदिर परिसर में श्री अनिल कुमार आचार्य द्वारा नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को भूमि की रजिस्ट्री सौंपते हुए उपस्थित समाजजन।
राजसमंद के कोठारिया में आचार्य ब्राह्मण समाज की वर्षों पुरानी सामाजिक धरोहर को सुरक्षित रखते हुए समाज को समर्पित करने का ऐतिहासिक दायित्व श्री अनिल कुमार आचार्य (पुत्र श्री नरेश कुमार आचार्य हीता, उदयपुर) ने निभाया। उन्होंने अपने स्वर्गीय दादा श्री काशीराम जी हीता के सपने को साकार करने की दिशा में समाज की भूमि की मूल रजिस्ट्री नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को विधिवत सौंप दी।
जानकारी के अनुसार, देवली शनि महाराज धर्मशाला के संस्थापक प्रेरणा स्रोत एवं समिति के संस्थापक सदस्य स्वर्गीय श्री काशीराम जी हीता ने दानदाताओं के सहयोग से आचार्य ब्राह्मण विकास समिति, मुख्यालय सनवाड़ के नाम समाज की भूमि दर्ज कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। समाज की इस धरोहर को सुरक्षित रखने का कार्य वर्षों तक किया गया, जिसे अब विधिवत समाज को सौंप दिया गया है।
कोठारिया स्थित भेरूजी मंदिर परिसर में आयोजित नवनिर्वाचित कार्यकारिणी की बैठक में श्री अनिल कुमार आचार्य ने समाजजनों की उपस्थिति में भूमि की मूल रजिस्ट्री अध्यक्ष श्री मुकेश जी आचार्य एवं नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को सौंपी। इस अवसर पर महासचिव श्री पवन जी ने समिति की ओर से अध्यक्ष के हस्ताक्षर एवं समिति की सील सहित विधिवत प्राप्ति रसीद श्री अनिल कुमार आचार्य को प्रदान की।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय श्री काशीराम जी का सपना था कि समाज की यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों के विकास का आधार बने। समाजजनों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस भूमि और धरोहर का उपयोग समाजहित में करते हुए विकास के नए आयाम स्थापित किए जाएंगे।
इस अवसर पर स्वर्गीय श्री रामेश्वर जी सनवाड़, स्वर्गीय श्री शांतीलाल जी हीता एवं स्वर्गीय श्री भगवतीलाल जी राजपुरा के योगदान को भी स्मरण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि इन समाजसेवियों ने भूमि को समाज के नाम कराने के लिए अथक प्रयास किए और उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
समाज के वरिष्ठजनों ने श्री अनिल कुमार आचार्य की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने समाज की अमूल्य धरोहर से जुड़े दस्तावेजों को वर्षों तक सुरक्षित एवं व्यवस्थित रूप से संरक्षित रखा तथा उचित समय पर उन्हें समाज को सौंपकर सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने यह भी बताया कि सबसे पहले इसी भूमि पर स्वर्गीय श्री काशीराम जी ने धर्मशाला निर्माण का सपना संजोया था। इसके लिए उन्होंने समाज को दान सहयोग के लिए प्रेरित किया और निर्माण कार्य हेतु स्वयं ₹11,000 की सहयोग राशि देने की घोषणा की थी, जो कुछ समय पूर्व जमा भी हुई।
कार्यक्रम में नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री मुकेश जी आचार्य, महासचिव श्री पवन जी, उपाध्यक्ष श्री प्रवीण जी, कोषाध्यक्ष श्री लोकेश जी, श्री भेरूलाल जी, श्री सुरेश जी कोठारिया, श्री उमेश जी, श्री अमरचंद जी सहित कार्यकारिणी के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। समाजजनों ने इस पहल को सामाजिक धरोहर के संरक्षण और भावी पीढ़ियों के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया।

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