आमेट। राजस्थान के न्यायिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई जब राजस्व मंडल अजमेर द्वारा लागू किए गए एक नए फरमान ने अधिवक्ताओं और किसानों के बीच असंतोष की ज्वाला भड़का दी। राजस्व मंडल द्वारा 12 जनवरी 2026 को प्रदेश के समस्त अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों में वाद और प्रकरणों को अनिवार्य रूप से ऑनलाइन प्रस्तुत करने के निर्णय ने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। इस निर्णय के विरोध में बार एसोसिएशन आमेट ने न केवल मोर्चा खोल दिया है, बल्कि सरकार और प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए न्यायिक कार्यों का बहिष्कार भी शुरू कर दिया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए बार एसोसिएशन आमेट के बैनर तले बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने उपखण्ड अधिकारी को राजस्व मंत्री एवं राज्यपाल के नाम एक कड़ा ज्ञापन सौंपा। इस विरोध प्रदर्शन की गूँज पूरे क्षेत्र में सुनाई दे रही है, जहाँ अधिवक्ता समुदाय इस नई व्यवस्था को कानूनी मर्यादाओं का उल्लंघन और आम आदमी के हितों पर कुठाराघात मान रहा है। बार एसोसिएशन का तर्क है कि इतना बड़ा प्रशासनिक परिवर्तन करने से पूर्व किसी भी बार संघ या अभिभाषक संगठन से मशविरा करना उचित नहीं समझा गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। साथ ही, रेवेन्यू कोर्ट मैनुअल में बिना किसी आवश्यक संशोधन के इस प्रणाली को थोपना विधिक रूप से त्रुटिपूर्ण प्रतीत होता है।

इस विरोध के केंद्र में सबसे बड़ा मुद्दा क्षेत्र के गरीब किसान और काश्तकार हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि राजस्व न्यायालयों के अधिकांश पक्षकार ग्रामीण परिवेश से आते हैं, जिन्हें जटिल ऑनलाइन पोर्टल और तकनीकी शब्दावली का रत्ती भर भी ज्ञान नहीं है। ऐसे में यह नई व्यवस्था उन पर आर्थिक बोझ तो बढ़ाएगी ही, साथ ही उन्हें बिचौलियों और तकनीकी विशेषज्ञों पर निर्भर होने को मजबूर कर देगी। वर्तमान में सरकारी पोर्टलों की खस्ताहाल स्थिति, बार-बार सर्वर डाउन होना और नेटवर्क की विफलता जैसी समस्याओं ने इस आशंका को और गहरा कर दिया है कि न्याय मिलने की प्रक्रिया सुगम होने के बजाय और अधिक पेचीदा और धीमी हो जाएगी।

अधिवक्ता समुदाय ने इसे अपने अधिकारों और न्यायिक स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार बताया है। इसी आक्रोश के चलते बार एसोसिएशन आमेट ने सर्वसम्मति से 22 जनवरी से 23 जनवरी 2026 तक न्यायिक कार्यों से सांकेतिक रूप से विरत रहने का निर्णय लिया है। इस प्रदर्शन के दौरान अध्यक्ष विरेंद्र सिंह चुण्डावत, वरिष्ठ अधिवक्ता किशनलाल शर्मा, मुकेश देवपुरा, संरक्षक प्रहलादसिंह चुण्डावत, वरिष्ठ उपाध्यक्ष भानु कुमार सोनी, उपाध्यक्ष मनोहर लाल खटीक, सचिव मोहम्मद नूर शैख़, समुन्द्र सिंह चुण्डावत, डालचंद्र जाट, प्रमोद लक्ष्कार, किशनलाल बैरवा एवं शांतिलाल मेघवाल सहित कई गणमान्य अधिवक्ता उपस्थित रहे। अधिवक्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि इस अव्यवहारिक निर्णय को वापस नहीं लिया गया, तो यह सांकेतिक विरोध जल्द ही एक उग्र आंदोलन में तब्दील हो जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

Mubarik Ajnabi, Rajsamand

Mubarik Ajnabi, Rajsamand

नाम: मुबारिक-अजनबी

वर्तमान पद: प्रतिनिधि (प्रातःकाल, आमेट)

कार्यक्षेत्र: आमेट, जिला राजसमन्द (राजस्थान)

अनुभव: 25 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव

परिचय एवं कार्यक्षेत्र 

मुबारिक-अजनबी राजस्थान के राजसमन्द जिले के आमेट तहसील क्षेत्र के अनुभवी पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं। वह आमेट तहसील और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

बीट (मुख्य विषय)

  • विशेष कवरेज: आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।
  • नियमित कवरेज: स्थानीय राजनीति, प्रशासन, कानून-व्यवस्था, सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और जनहित से जुड़े अन्य मुद्दे।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

एम.ए. (M.A.) - कला स्नातकोत्तर की डिग्री।

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