राजसमंद में उमड़ा आस्था का सैलाब: भव्य शोभायात्रा के साथ गूंजा अखंड भारत का संकल्प, 'पंच परिवर्तन' से बदलेगी समाज की तस्वीर
राजसमंद में आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर भव्य हिंदू सम्मेलन और शोभायात्रा का आयोजन किया गया। हजारों महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली और मुनि संबोध कुमार व सुरेंद्र सिंह राव ने अखंड भारत व सामाजिक समरसता का संदेश दिया। जानिए कैसे 2100 कलशों और भव्य झांकियों के साथ शहर बना भक्तिमय और राष्ट्रवाद का केंद्र।

राजसमंद। शौर्य और भक्ति की धरा राजसमंद के हृदयस्थल पर रविवार को आस्था, उत्साह और राष्ट्रवाद का एक ऐसा त्रिवेणी संगम देखने को मिला, जिसने जन-मन को सराबोर कर दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में द्वारकेश बस्ती द्वारा आयोजित 'हिंदू सम्मेलन' मात्र एक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और अखंड भारत के संकल्प का एक जीवंत उद्घोष बन गया। गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों की गूंज और हजारों की संख्या में उमड़ी मातृशक्ति के कलशों की चमक ने शहर की सड़कों को केसरिया रंग में रंग दिया।
इस ऐतिहासिक समागम का आगाज़ दोपहर एक बजे कुमावत समाज नोहरा हाथीनाड़ा स्थित केदारेश्वर महादेव मंदिर से एक भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ। यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए निकली, जहाँ करीब 2100 महिलाएं सिर पर मंगल कलश धारण कर भक्ति भाव से नृत्य करती नजर आईं। शोभायात्रा की भव्यता का आलम यह था कि इसमें शामिल बाबा रामदेव, प्रभु चारभुजा नाथ और सांवरिया सेठ की मनमोहक झांकियां हर किसी के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। विशेष रूप से भारत माता का रूप धरे नन्ही बालिका और प्रभु श्रीनाथजी के जीवंत स्वरूप के साथ सेल्फी लेने के लिए युवाओं और स्थानीय निवासियों में जबरदस्त होड़ मची रही। मुखजी चौराहा, जेके मोड़ और कांकरोली पुराने बस स्टैंड पर शहरवासियों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का पलक-पावड़े बिछाकर स्वागत किया।
शोभायात्रा के पश्चात द्वारकेश वाटिका में आयोजित विशाल धर्मसभा में आध्यात्मिक और वैचारिक ऊर्जा का संचार हुआ। मुख्य वक्ता विश्व हिंदू परिषद के सुरेंद्र सिंह राव ने श्रीमद्भागवत के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की नीति सदैव पूरे संसार को शांति, अध्यात्म और आनंद देने की रही है। उन्होंने गुरु रामदास-शिवाजी और तुलसीदास, कबीर व सूरदास जैसे संतों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे विचारों और कर्मों ने समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाए। उन्होंने जोर दिया कि 'सर्वे भवंतु सुखिन:' और 'वसुधैव कुटुंबकम' ही हमारी संस्कृति का मूल आधार है, जिस पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए।
इसी क्रम में मुनि संबोध कुमार मेघांश ने राष्ट्रवाद की अलख जगाते हुए एक सशक्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति चाहे किसी भी साहित्य का अध्ययन करे, उसके विचारों में सदैव 'भारत' झलकना चाहिए। मुनि ने स्पष्ट शब्दों में आह्वान किया कि प्रत्येक नागरिक को यह गर्व होना चाहिए कि वह अखंड भारत का हिस्सा है। उन्होंने सोशल मीडिया के सतर्क उपयोग की सलाह देते हुए कहा कि हमारी पहचान संप्रदाय से ऊपर उठकर 'हिंदुस्तानी' के रूप में होनी चाहिए।
समारोह में विशिष्ट अतिथि किन्नर समाज की प्रमुखा पारसमणी भुआजी, कार्यक्रम संयोजक चंद्र मोहन सोलंकी, सह संयोजक अशोक रांका, मुनि विशाल कुमार और द्वारकाधीश मंदिर के विशेषाधिकारी देव शंकर शास्त्री मंचासिन रहे। कार्यक्रम का संचालन हित्विका शर्मा और तरुणा कुमावत ने किया, जबकि रजनीकांत साहू ने परिचय और मोहन कुमावत ने रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अवसर पर विधायक दीप्ति माहेश्वरी, पूर्व विधायक बंशीलाल गहलोत, भाजपा जिलाध्यक्ष जगदीश पालीवाल, प्रधान अरविंदसिंह राठौड़ सहित फतेहचंद शामसुखा, मिठ्ठालाल शर्मा, कौशल गौड़, कमल जैन, सुनिल दाधीच, पुरूषोतम लक्षकार, कमलेश हिंगड़, चांदमल जोशी, हेमंत पालीवाल, अनिल खंडेलवाल, घनश्याम बागोरा, दिनेश पामेचा, सुरेश पालीवाल, जगदीश कुमावत, सुशील बड़ाला, हरीश कुमावत, कमल गौड, सविता सनाढ्य और प्रेम हाड़ा जैसे अनेक गणमान्य नागरिक और जनप्रतिनिधि साक्षी बने।
आयोजन समिति के दिनेश कुमावत, जितेश साहू, भानु कुमावत, देशबंधु रांका, राजकुमार अग्रवाल, सुरेश भाट, अनिल खटीक, पंकज बाफना, प्रमोद सेन, संजय कुमावत, संदीप पालीवाल, ओम शर्मा, तुलसीराम कुमावत, शंकर मादरेचा, नितिन सोनी, राजु साहू, देवांश नंदवाना, विजय बाफना, विनोद आचार्य, हरीश अग्रवाल और नरेश कुमावत ने अतिथियों का श्रीराम की छवि और साहित्य भेंट कर सम्मान किया। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस उपाधीक्षक नेत्रपालसिंह और थाना अधिकारी सरोज बैरवा के नेतृत्व में भारी पुलिस जाब्ता तैनात रहा। अंत में हिम्मत कुमावत ने सभी का आभार व्यक्त किया। यह सम्मेलन न केवल संघ के सौ वर्षों की यात्रा का उत्सव रहा, बल्कि इसने सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों के 'पंच परिवर्तन' के माध्यम से एक सशक्त राष्ट्र निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त किया।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
