केलवा। आस्था और सेवा के संगम की एक अनुपम तस्वीर राजसमंद जिले के केलवा क्षेत्र से सामने आई है, जहाँ मकर संक्रांति के पावन पर्व के दूसरे दिन श्री नवल श्याम कृष्ण गौशाला भक्तिमय उत्सव का केंद्र बन गई। अलसुबह से ही गौशाला परिसर में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा, जो गौ माता के प्रति अटूट श्रद्धा और सेवा भाव का जीवंत उदाहरण पेश कर रहा था। श्रद्धालुओं ने न केवल गौ माता की पूजा-अर्चना की, बल्कि अपने परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना के साथ दान-पुण्य के विशेष अनुष्ठान में भी हिस्सा लिया।

इस धार्मिक आयोजन का मुख्य आकर्षण 'तुलादान' रहा, जो शास्त्रों में अत्यंत फलदायी और पुण्यकारी माना गया है। इस विशेष अवसर पर श्रद्धालुओं ने अपने वजन के बराबर गुड़ का दान कर उसे गौ माता को भोग के रूप में अर्पित किया। गौशाला प्रबंधन के पोपट माली और भरत रजक के मार्गदर्शन में पूर्व प्रधानाचार्य देवीलाल रजक, सोसर देवी और मदन तेली ने विधि-विधान के साथ तुलादान का अनुष्ठान संपन्न किया। वातावरण उस समय पूरी तरह भक्ति के रंग में रंग गया जब तुलादान के साथ-साथ भजनों की मधुर स्वर लहरियों ने परिसर को गुंजायमान कर दिया।

आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए गौशाला समिति के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र बोहरा ने कहा कि मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में किया गया गौसेवा का यह संकल्प जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार करता है। दान की महिमा केवल गुड़ के भोग तक सीमित नहीं रही, बल्कि श्रद्धालुओं ने उदारता दिखाते हुए अनाज, चारा, हरा चारा और नकद राशि भी गौशाला को भेंट की। प्रबंधन ने सभी दानदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए इस बात पर जोर दिया कि समाज के सामूहिक सहयोग से ही गौवंश का संरक्षण और सेवा निरंतर संभव हो पा रही है। केलवा में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया, बल्कि सामाजिक एकजुटता का भी एक सशक्त संदेश प्रसारित किया है।

Pratahkal Bureau

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