केलवा की नवल श्याम कृष्ण गौशाला में मकर संक्रांति पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, भजनों की स्वर लहरियों पर झूम उठे गोभक्त
केलवा के श्री नवल श्याम कृष्ण गौशाला में मकर संक्रांति पर आयोजित भजन संध्या में शैतान बंजारा की प्रस्तुतियों ने गोभक्तों को भावविभोर कर दिया। दानदाताओं ने दिल खोलकर गौ सेवा की और मेवाड़ी परंपरा से भामाशाहों का सम्मान किया गया। सियाणा और सादडा की गौशालाओं में भी दिखा भक्ति का अनूठा संगम। पूरी खबर पढ़ें।

केलवा। आस्था, दान-पुण्य और सेवा के महापर्व मकर संक्रांति के पावन अवसर पर केलवा स्थित श्री नवल श्याम कृष्ण गौशाला भक्ति के अनूठे रंग में रंग गई। मंगलवार को आयोजित भव्य भजन संध्या ने क्षेत्र के वातावरण को धर्ममय बना दिया, जहां सुरों की सरिता में गोभक्त रातभर गोते लगाते रहे। भजन सम्राट शैतान बंजारा एंड पार्टी ने अपनी जादुई प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि पांडाल में मौजूद हर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर झूमने पर मजबूर हो गया। कार्यक्रम का आगाज़ गजानन महाराज और खाटू श्याम दरबार की दिव्य वंदना के साथ हुआ, जिसके बाद भक्ति संगीत का एक ऐसा सिलसिला शुरू हुआ जिसने केलवा की धरा को साक्षात गोकुल में बदल दिया।
गायक शैतान बंजारा ने जब 'बांस की बांसुरी पर घणो रे इतरावे हो बंसी सोने री वेती तो' और 'छोटी-छोटी गैया, छोटे-छोटे ग्वाल' जैसे कालजयी भजनों की प्रस्तुति दी, तो समूचा वातावरण गोमाता की जयकारों से गूंज उठा। 'इन दुनिया में गौ माता भगवान कहीजे' और 'राख भरोसो भारी सांवरिया है रखवाला' जैसे भजनों के माध्यम से गौ सेवा की महत्ता को रेखांकित किया गया। वहीं, 'सुन सावरिया मंडफिया वाले काली गाड़ी लानी है' और 'आओ महाराज नटवर नागरिया पधारो मारे' जैसे भजनों ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। उत्सव के दौरान दान-पुण्य की भी अविरल धारा बही। भामाशाहों और स्थानीय ग्रामीणों ने गौमाता को हरा चारा एवं तिल के लड्डू खिलाकर पुण्य अर्जित किया। गौशाला प्रबंधन की ओर से भामाशाहों का मेवाड़ी परंपरा के अनुरूप पगड़ी और इकलाई पहनाकर भव्य अभिनंदन किया गया।
इस गरिमामय आयोजन में भामाशाह तनसुख बोहरा, गौशाला अध्यक्ष रामनारायण पालीवाल, पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र बोहरा, महेंद्र कोठारी अफेक्स, नरेंद्र कोठारी, सुभाष कोठारी, नाथू लाल तेली, देवी लाल सिंधल, लालू राम सिंधल, पोपट माली, नारायण तेली देवपुरा, मुकेश कुमावत, संजय पालीवाल, कुंदन, मदन पालीवाल, रमेश, सुनील, लाल चंद और नरेश पालीवाल सहित बड़ी संख्या में गोभक्त साक्षी बने। भक्ति का यह उत्साह केवल केलवा तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि श्री धेनु गोपाल गौशाला सियाणा और सादडा स्थित राधे गोविंद गौशाला में भी श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर दान-पुण्य किया। सियाणा में धर्मु भाई गुर्जर और भैरूलाल कुमावत सहित कई गणमान्य नागरिकों ने गौ सेवा का संकल्प दोहराया। यह आयोजन न केवल धार्मिक उल्लास का प्रतीक बना, बल्कि समाज में जीव दया और गौ संरक्षण के प्रति अटूट आस्था को भी सुदृढ़ कर गया।

Pratahkal Bureau
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