आमेट में मौत का 'हाई वोल्टेज' तांडव: 11 KV लाइन की चपेट में आने से 10 वर्षीय मासूम की मौत, मुआवजे के बाद शांत हुआ परिजनों का आक्रोश
राजसमंद के आमेट थाना क्षेत्र के लिकी गांव में 11 KV विद्युत लाइन की चपेट में आने से 10 वर्षीय जितेंद्र सिंह की दर्दनाक मौत हो गई। बिजली विभाग की लापरवाही से नाराज परिजनों ने अस्पताल में भारी हंगामा किया, जिसके बाद प्रशासन और विभाग ने 5 लाख रुपये के मुआवजे पर सहमति बनाई। इस हृदयविदारक घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में असुरक्षित बिजली लाइनों और विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आमेट (राजसमंद): राजसमंद जिले के आमेट थाना क्षेत्र के लिकी गांव में बीती शाम एक ऐसी हृदयविदारक घटना घटी जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। शाम करीब 6 बजे, जब गांव की गलियां शांत होने की ओर बढ़ रही थीं, तभी 11 हजार केवी की हाई वोल्टेज विद्युत लाइन एक मासूम की जिंदगी का काल बन गई। लिकी निवासी कैलाश सिंह रावत का 10 वर्षीय पुत्र जितेंद्र सिंह खेलते समय अचानक बिजली के पोल के पास बिछे मौत के जाल की चपेट में आ गया। जब परिजनों ने जितेंद्र को पोल के पास अचेत और गंभीर अवस्था में पड़ा देखा, तो गांव में चीख-पुकार मच गई। आनन-फानन में मासूम को आमेट उप जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस खबर के फैलते ही गांव में मातम के साथ-साथ बिजली विभाग के प्रति गहरा आक्रोश भी व्याप्त हो गया।
शुक्रवार सुबह होते ही अस्पताल परिसर छावनी में तब्दील हो गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण और शोक संतप्त परिजन एकत्रित हुए और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। परिजनों का स्पष्ट आरोप था कि विभाग की लापरवाही और क्षेत्र में झूलती खतरनाक बिजली लाइनों ने उनके बच्चे की जान ली है। ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जर्जर और नीची लटकती लाइनों के बारे में कई बार शिकायतें की गई थीं, लेकिन विभाग कुंभकर्णी नींद सोया रहा। स्थिति की गंभीरता और बढ़ते तनाव को देखते हुए आमेट थाना अधिकारी ओम सिंह चुंडावत भारी पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर पहुंचे ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
मामले को सुलझाने और ग्रामीणों के गुस्से को शांत करने के लिए प्रशासनिक अमला भी हरकत में आया। तहसीलदार देवीलाल राणा, विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता (XEN) सत्यपाल सिंह और सहायक अभियंता (AEN) उमेश कुमार दुबे तत्काल अस्पताल पहुंचे। वहां अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच घंटों तक वार्ता का दौर चला। लंबी खींचतान और समझाइश के बाद, विद्युत विभाग ने मृतक के परिजनों को विद्युत दुर्घटना मुआवजा योजना के तहत 5 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करने की घोषणा की। इस आर्थिक सहायता पर सहमति बनने के बाद ही परिजनों ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए अनुमति दी। प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया है, जिसके बाद मासूम का शव परिजनों को सुपुर्द किया गया। यह हादसा क्षेत्र में बिजली तंत्र की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान छोड़ गया है।

Pratahkal Bureau
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