राजसमंद (केलवा): मेवाड़ की पावन धरा पर आज भक्ति, शक्ति और संस्कृति का एक अनूठा संगम देखने को मिलेगा। केलवा क्षेत्र के इतिहास में आज का दिन स्वर्णाक्षरों में दर्ज होने जा रहा है, क्योंकि यहाँ आयोजित होने वाला 'विराट हिंदू सम्मेलन' न केवल धार्मिक एकजुटता का प्रतीक बनेगा, बल्कि अपनी भव्यता से पूरे क्षेत्र को सराबोर कर देगा। इस ऐतिहासिक आयोजन का मुख्य आकर्षण 2100 दिव्य कलशों के साथ निकलने वाली वह विशाल कलश यात्रा होगी, जिसमें हजारों की संख्या में मातृशक्ति धर्म की ध्वजा थामे कदम से कदम मिलाएंगी।

आयोजन की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केलवा मंडल के अंतर्गत आने वाले 11 प्रमुख गांवों—पिपलिया, तलाई, मोखमपुरा, शार्दुल, उमटी, झांझर, किशनपुरा, उम्मेदपुरा, और बागुंदड़ा—से लगभग दस से बारह हजार श्रद्धालु इस महासमागम का हिस्सा बनने पहुंच रहे हैं। क्षेत्र में पिछले कई दिनों से बना उत्साह अब चरम पर है और समूचा केलवा भगवा रंग में रंगा नजर आ रहा है।

कार्यक्रम की रूपरेखा के अनुसार, यह दिव्य कलश यात्रा गायत्री मंदिर, अंबावा से पूरी भव्यता के साथ प्रारंभ होगी। ढोल-नगाड़ों की गूँज और भक्ति संगीत की लहरों के बीच यह यात्रा छत्री चौक और सूरजपोल जैसे प्रमुख मार्गों से गुजरती हुई भिक्षु विहार तक पहुंचेगी। शोभायात्रा में शामिल आकर्षक झांकियां श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी, जिनमें कच्ची घोड़ी नृत्य की कलाबाजी, बाहुबली हनुमान जी की विराट झांकी, अघोरी भोलेनाथ का जीवंत स्वरूप और राधा-कृष्ण की मनमोहक प्रस्तुति उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर देगी।

इस विशाल आयोजन के सुचारु संचालन के लिए प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। कार्यक्रम के अध्यक्ष शंभू लाल सोनी एवं संयोजक सुरेश कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आयोजन स्थल पर एक विशाल वाटरप्रूफ पंडाल तैयार किया गया है। यातायात व्यवस्था बाधित न हो, इसके लिए वाहनों की पार्किंग हेतु पृथक और सुव्यवस्थित स्थान चिन्हित किए गए हैं। आयोजन समिति ने सुरक्षा, भोजन, स्वागत और मंच संचालन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के लिए विभिन्न उपसमितियों का गठन किया है, ताकि प्रत्येक गतिविधि गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

शोभायात्रा के समापन के पश्चात आयोजित होने वाली विराट धर्मसभा में प्रखर वक्ता और संत-महात्मा शिरकत करेंगे। इस सभा का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज की एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। धर्मसभा के अंत में समस्त समाजजनों के लिए महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा, जो सामूहिक भोज के माध्यम से बंधुत्व की भावना को और प्रगाढ़ करेगा। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रदर्शन है, बल्कि यह बदलते परिवेश में अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूती से थामे रखने का एक सशक्त उद्घोष भी है।

Pratahkal Newsroom

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