लावासरदारगढ़। जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य अनुशास्ता महामना आचार्यश्री भिक्षु की जन्मस्थली कंटालिया में आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार से भव्य कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर साध्वी शरदयशाजी ने गीत के माध्यम से आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।

कार्यक्रम का मुख्य विषय था ‘आचार्यश्री भिक्षु की शिष्य परंपरा’। मुनि सिद्धकुमारजी ने इस विषय पर अपने विचार साझा किए और आचार्यश्री भिक्षु की उत्कृष्ट शिष्य परंपरा की विशेषता उजागर की। आचार्यश्री महाश्रमणजी ने चतुर्विध धर्मसंघ को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि धर्म एक ऐसा कल्पवृक्ष है, जिसके माध्यम से जीवन में राज्य, सुयोग्य पुत्र, रूप, विशेष ज्ञान, चातुर्य और गुणों का विकास संभव है। उन्होंने यह भी बताया कि योग्य शिष्यों की प्राप्ति भाग्य और धर्म के मेल से होती है।

आचार्यश्री भिक्षु स्वामी की शिष्य संपदा भी अत्यंत प्रशंसनीय रही है। उन्होंने अपने सहवर्ती संतों को सम्मान प्रदान किया और इसी के बदले संतों ने आचार्यश्री का उच्च मान बनाए रखा। आचार्यश्री के योग्य शिष्यों में ऐसा समर्पण देखा गया कि वे बिना पूछे किसी भी आदेश का पालन करने के लिए तत्पर रहते थे। आचार्यश्री महाश्रमणजी ने यह भी कामना की कि धर्मसंघ के सभी साधु-साध्वियों में योग्यता और समर्पण का विकास निरंतर बना रहे।

विश्व ध्यान दिवस के अवसर पर आचार्यश्री की अनुज्ञा से साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने साधु-साध्वियों को कुछ समय के लिए ध्यान अभ्यास कराया। साध्वी कीर्तिलताजी ने सहवर्ती साध्वियों के साथ संवादात्मक प्रस्तुति दी और गीत का संगान कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की। ईक्षु और जियाना ने बालसुलभ प्रस्तुतियों से सभी का मन मोहा।

संजय मरलेचा और महेन्द्र मरलेचा ने अपने अनुभव साझा किए। पवन अग्रवाल ने ‘भिक्षु आराधना’ पुस्तिका का लोकार्पण आचार्यश्री के समक्ष किया और आचार्यश्री ने इसे मंगलमय आशीर्वाद से सम्मानित किया। सहाडा विधायक लादूलाल पितलिया ने भी अपनी भावनाओं का प्रदर्शन किया और गंगापुरवासियों के साथ चतुर्मास की प्रार्थना में सम्मिलित हुए। पूर्व न्यायाधीश गौतम चोरड़िया ने भी इस अवसर पर अपनी भावाभिव्यक्ति दी।

इस प्रकार, कार्यक्रम ने न केवल आचार्यश्री भिक्षु की शिष्य परंपरा के महत्व को उजागर किया, बल्कि धर्मसंघ की शिष्य संपदा और आध्यात्मिक समर्पण को भी व्यापक रूप से प्रदर्शित किया।

Mubarik Ajnabi, Rajsamand

Mubarik Ajnabi, Rajsamand

नाम: मुबारिक-अजनबी

वर्तमान पद: प्रतिनिधि (प्रातःकाल, आमेट)

कार्यक्षेत्र: आमेट, जिला राजसमन्द (राजस्थान)

अनुभव: 25 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव

परिचय एवं कार्यक्षेत्र 

मुबारिक-अजनबी राजस्थान के राजसमन्द जिले के आमेट तहसील क्षेत्र के अनुभवी पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं। वह आमेट तहसील और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

बीट (मुख्य विषय)

  • विशेष कवरेज: आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।
  • नियमित कवरेज: स्थानीय राजनीति, प्रशासन, कानून-व्यवस्था, सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और जनहित से जुड़े अन्य मुद्दे।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

एम.ए. (M.A.) - कला स्नातकोत्तर की डिग्री।

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