नाथद्वारा। शिक्षा जगत में अपनी उपेक्षा और नीतिगत भेदभाव से त्रस्त निजी शिक्षण संस्थाओं ने अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। आगामी 30 जनवरी 2026 को प्रस्तावित जिला स्तरीय विशाल धरना-प्रदर्शन, सभा और वाहन रैली को ऐतिहासिक बनाने के लिए नाथद्वारा, देलवाड़ा और भीम ब्लॉक के निजी विद्यालय संगठनों ने संयुक्त रूप से शक्ति प्रदर्शन की तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में नाथद्वारा नगर की गलियों से लेकर ब्लॉक स्तर तक एक सघन जनसंपर्क अभियान चलाया गया, जिसने क्षेत्र के शैक्षणिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

यह महाभियान जिला संयोजक एवं संरक्षक लाल सिंह झाला के ओजस्वी नेतृत्व में संचालित हुआ। देलवाड़ा, खमनोर और भीम ब्लॉक की संयुक्त टोलियों ने घर-घर और विद्यालय-विद्यालय जाकर संचालकों को एकजुट होने का आह्वान किया। इस अभियान का मूल उद्देश्य केवल भीड़ जुटाना नहीं, बल्कि निजी शिक्षा के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरों के विरुद्ध एक सामूहिक चेतना जागृत करना है। चर्चा के केंद्र में वे ज्वलंत मुद्दे रहे जो लंबे समय से निजी स्कूलों की रीढ़ तोड़ रहे हैं, जिनमें आरटीई (RTE) के तहत लंबित पुनर्भरण भुगतान, समान परीक्षा योजना की जटिल विसंगतियां और खेल प्रतियोगिताओं में निजी स्कूलों के छात्रों व खेल शिक्षकों के साथ होने वाला सौतेला व्यवहार प्रमुख हैं।

इस महत्वपूर्ण जनसंपर्क के दौरान संगठन की शक्ति को मजबूत करने के लिए जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष जवान सिंह देवड़ा, जिला कोषाध्यक्ष डॉ. किरण कुमार गन्ना और खमनोर ब्लॉक अध्यक्ष चम्पालाल गाडरी ने मोर्चा संभाला। उनके साथ खमनोर ब्लॉक सचिव के.के. पुरोहित, देलवाड़ा ब्लॉक अध्यक्ष चतर सिंह चौहान, ब्लॉक सचिव अभिषेक पालीवाल और ब्लॉक उपाध्यक्ष गिरिश श्रीमाली ने भी विद्यालय संचालकों से सीधा संवाद स्थापित कर उन्हें आंदोलन की रणनीति से अवगत कराया। भीम ब्लॉक की ओर से कोषाध्यक्ष भवधीर सिंह ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई।

अभियान के दौरान रंजना वैष्णव, दीपा पालीवाल, दीनदयाल गोस्वामी, हेमलता गोस्वामी और सनोज तोमर सहित बड़ी संख्या में समर्पित शिक्षकों और संचालकों ने इस मुहिम को अपना पूर्ण समर्थन दिया। प्रत्येक विद्यालय से यह स्वर मुखर हुआ कि 30 जनवरी को नाथद्वारा, देलवाड़ा और भीम ब्लॉक से जनसैलाब उमड़ेगा, जो शासन और प्रशासन को निजी शिक्षा के अधिकारों के प्रति सजग रहने का कड़ा संदेश देगा।

संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आज निजी विद्यालय न केवल वित्तीय दबाव झेल रहे हैं, बल्कि अव्यावहारिक सरकारी आदेशों के कारण उनका अस्तित्व भी संकट में है। ऐसे में यह आंदोलन मात्र एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि निजी शिक्षा के सम्मान, न्याय और भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक निर्णायक 'महासंग्राम' सिद्ध होगा। 30 जनवरी को होने वाली यह हुंकार राजस्थान की शैक्षणिक राजनीति में एक नया अध्याय लिखने को तैयार है।

Mubarik Ajnabi, Rajsamand

Mubarik Ajnabi, Rajsamand

नाम: मुबारिक-अजनबी

वर्तमान पद: प्रतिनिधि (प्रातःकाल, आमेट)

कार्यक्षेत्र: आमेट, जिला राजसमन्द (राजस्थान)

अनुभव: 25 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव

परिचय एवं कार्यक्षेत्र 

मुबारिक-अजनबी राजस्थान के राजसमन्द जिले के आमेट तहसील क्षेत्र के अनुभवी पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं। वह आमेट तहसील और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से नियमित रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

बीट (मुख्य विषय)

  • विशेष कवरेज: आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।
  • नियमित कवरेज: स्थानीय राजनीति, प्रशासन, कानून-व्यवस्था, सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और जनहित से जुड़े अन्य मुद्दे।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

एम.ए. (M.A.) - कला स्नातकोत्तर की डिग्री।

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