आमेट। शौर्य और साहित्य की धरा आमेट में उस समय बौद्धिक चेतना का अनूठा दृश्य देखने को मिला, जब पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के मित्र मंडल परिसर में साकेत साहित्य संस्थान के तत्वाधान में तहसील स्तरीय एक दिवसीय अधिवेशन का शंखनाद हुआ। यह आयोजन केवल एक बैठक मात्र नहीं था, बल्कि शिक्षा और साहित्य के अंतर्संबंधों को मजबूत करने वाला एक मील का पत्थर साबित हुआ। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में राजसमंद के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर कुमार बाल्दी का जिस भव्यता के साथ सम्मान किया गया, उसने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

समारोह की गरिमा को बढ़ाते हुए मुख्य अतिथि रामेश्वर कुमार बाल्दी ने अपने संबोधन में साकेत साहित्य संस्थान द्वारा संचालित रचनात्मक गतिविधियों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्थान जिस प्रकार साहित्यिक सृजन और काव्य पुस्तकों के माध्यम से समाज को नई दिशा दे रहा है, वह शिक्षा जगत के लिए भी गौरव का विषय है। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के तहसील अध्यक्ष मुकेश वैष्णव ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नारायण सिंह राव, जिलाध्यक्ष वीणा वैष्णव और पीईईओ आईडाणा महावीर प्रसाद बघेरवाल ने मंच की शोभा बढ़ाई।

परंपरा और सम्मान के अनूठे संगम में जिलाध्यक्ष वीणा वैष्णव, जिला उपाध्यक्ष नारायण सिंह राव और तहसील अध्यक्ष मुकेश वैष्णव सहित कार्यकारिणी ने मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी बाल्दी का तिलक लगाकर, ईकलाई ओढ़ाकर और मेवाड़ी पगड़ी पहनाकर राजस्थानी संस्कृति के अनुरूप भावभीना अभिनंदन किया। संस्थान के संस्थापक नारायण सिंह राव ने इस अवसर पर राजकीय गतिविधियों में साहित्य जगत की सक्रिय सहभागिता पर विस्तार से प्रकाश डाला, जिससे स्पष्ट हुआ कि शिक्षा और साहित्य एक-दूसरे के पूरक के रूप में कार्य कर रहे हैं।

इस गौरवशाली क्षण के साक्षी के रूप में संस्थान के संरक्षक प्रकाश चन्द्र बडोला, सभाध्यक्ष पारसमल जाट, उपाध्यक्ष जगदीश चन्द्र शर्मा, सचिव गायड़ सिंह चुण्डावत और कोषाध्यक्ष छोटू लाल जीनगर उपस्थित रहे। इनके साथ ही महिला मंत्री उषा मेवाड़ा, संगठन मंत्री राम नारायण सालवी, मीडिया प्रभारी गणपत लाल चौधरी, अमित विजयवर्गीय, गजराज सिंह चारण, अशोक खटीक सियाणा, गजेन्द्र फुलवारियां, यशवंत वर्मा, अरविंद कुमार विश्नोई और प्रभु लाल शर्मा जैसे प्रबुद्धजनों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और भी प्रभावशाली बना दिया। अंत में मुकेश वैष्णव ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन न केवल एक व्यक्ति का सम्मान था, बल्कि आमेट में साहित्य की निरंतर प्रज्वलित होती मशाल का प्रमाण भी था।

Pratahkal Newsroom

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