कत्थक नृत्य में भक्तिमय आभा बिखेर गईं विश्वप्रसिद्ध नृत्यांगना मौमिता घोष हनुमान चालीसा पर अद्भुत प्रस्तुति से बच्चों ने महसूस की भक्ति और कला का संगम
झालरापाटन के संस्कार विद्या मंदिर में स्पिक मैके द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विश्वप्रसिद्ध नृत्यांगना मौमिता घोष ने हनुमान चालीसा पर अद्भुत कत्थक प्रस्तुति दी। भाव, लय और भक्ति से सजी इस प्रस्तुति ने छात्रों को भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय नृत्य की गहराइयों से परिचित कराया।

झालरापाटन। संस्कार विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल का सभागार सोमवार को तब तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा जब विश्वप्रसिद्ध नृत्यांगना मौमिता घोष ने अपनी अनुपम कत्थक नृत्य प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। दिल्ली से पधारी इस नृत्यांगना ने स्पिक मैके संस्थान के तत्वावधान में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गहराइयों को जिस भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया, उसने विद्यालय के छात्रों को भारतीय संस्कृति की आत्मा से जोड़ दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत में मौमिता घोष ने हनुमान चालीसा पर एक अद्भुत भक्तिमय नृत्य प्रस्तुति दी, जिसमें उनके भाव, मुद्रा और लय के सम्मिलन ने उपस्थित जनसमूह को आस्था और कला की एक नई अनुभूति कराई। दर्शकों में बैठे छात्र-छात्राएं जहां भक्ति रस में डूबे नजर आए, वहीं शिक्षकों और अतिथियों ने उनकी नृत्य-कला की परिपक्वता की सराहना की।
कार्यक्रम समन्वयक कुलवंत बैरागी ने मंच संचालन करते हुए बताया कि स्पिक मैके का उद्देश्य देशभर के युवाओं को भारतीय परंपरा, संस्कृति और शास्त्रीय कलाओं से जोड़ना है। इस अवसर पर मौमिता घोष ने विद्यार्थियों को नृत्य की विभिन्न मुद्राएं, ताल एवं स्टेप्स सिखाए। उन्होंने कहा कि “शास्त्रीय नृत्य की विशेषता यह है कि इसमें शरीर का हर अंग—चेहरा, आंखें, हाथ, उंगलियां और पैर—भावों के माध्यम से कहानी कहता है। यही इस कला की आत्मा है।”
कार्यक्रम के आयोजक सुरेंद्र कुमार जैन ने नृत्यांगना और उनके साथियों का परिचय देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण के वाहक हैं। विद्यालय निदेशक अवनींद्र व्यास, पूर्व पार्षद रितु व्यास और प्रधानाचार्य सूरज प्रकाश शर्मा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए उनके इस प्रयास को भारतीय कला और परंपरा के संरक्षण में महत्वपूर्ण बताया।
आयोजन में अध्यापक हरिप्रसाद शर्मा, बृजमोहन रेगर, हितेश प्रजापति और दिव्या नागर ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम के समापन पर सभी ने मौमिता घोष और उनकी टीम को खड़े होकर सम्मानित किया, वहीं छात्रों ने भी उनके साथ नृत्य की कुछ मुद्राओं को दोहराते हुए भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी रुचि प्रकट की।
यह आयोजन न केवल कला का उत्सव था, बल्कि यह भारतीय संस्कृति के उस जीवंत स्वरूप का दर्शन भी था, जो भाव, भक्ति और नृत्य की एकता में बसता है।

Suresh Momiya, Jhalawar
नाम: सुरेश कुमार गोयल (मोमिया)
वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)
कार्यक्षेत्र: झालरापाटन, जिला झालावाड़ (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण विषय
परिचय
सुरेश कुमार गोयल (मोमिया) राजस्थान के झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' में सीनियर पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। वह झालरापाटन और झालावाड़ जिले से जुड़ी राजनीति, अपराध (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न प्रकार की क्षेत्रीय और जनहित की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के साथ-साथ निम्नलिखित समाचार पत्रों के लिए भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं:
- दैनिक बढ़ता राजस्थान
- दैनिक कोटा ब्यूरो
- दैनिक दो गज दूरी
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
