भारत के इतिहास में मेवाड़ की भूमि सदैव वीरता, त्याग और धर्मनिष्ठा की प्रतीक रही है। इसी पावन भूमि पर जन्मे कालभोज, जिन्हें 'बप्पा रावल' के नाम से भी जाना जाता है, ने न केवल गुहिल वंश को गौरव प्रदान किया, बल्कि मेवाड़ साम्राज्य की नींव रखकर इतिहास में अमर हो गए। 8वीं शताब्दी के इस अद्वितीय योद्धा को अरब आक्रमणों को उत्तर-पश्चिम भारत से पराजित कर बाहर खदेड़ने का श्रेय दिया जाता है।

15वीं शताब्दी के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘एकलिंग पुराण’ के अनुसार, बप्पा रावल गुहिल वंश के संस्थापक गुहदत्त के नववे वंशज थे। इस ग्रंथ में वर्णित है कि बप्पा रावल ने ईस्वी सन 728 में मेवाड़ राज्य की स्थापना की और भगवान शिव के स्वरूप एकलिंगजी मंदिर का निर्माण कराया, जो आज भी मेवाड़ राजवंश का कुलदेव स्थान माना जाता है।

इतिहास के अनुसार, बप्पा रावल के पिता नागदित्य और उनके परिवार के सभी पुरुष सदस्य ईडर के भीलों से हुए संघर्ष में वीरगति को प्राप्त हुए। उस समय बालक बप्पा को उनके दो विश्वस्त भील अनुयायियों ने छिपाकर सुरक्षित रखा। कालांतर में, नागदा नामक स्थान पर एक ब्राह्मणी ने उनका पालन-पोषण किया और उन्हें गौपालक के रूप में कार्यरत रखा।

एक दिन, गौचारण के दौरान बप्पा रावल की भेंट महान ऋषि हरित ऋषि से हुई। इस भेंट ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। हरित ऋषि ने उन्हें शैव संप्रदाय में दीक्षित किया और तपस्या का मार्ग दिखाया। कहा जाता है कि कालभोज (बप्पा रावल) ने अद्वितीय अध्यात्म और साधना प्राप्त की। ऋषि के आदेशानुसार, जब उनकी तपस्या पूर्ण हुई, तो उन्होंने अपने पिता के हत्यारों को पराजित किया और मेवाड़ का स्वतंत्र राज्य स्थापित किया।

हरित ऋषि ने ही बप्पा रावल को भगवान शिव के आराधना स्थल — एकलिंगजी मंदिर — के निर्माण के लिए प्रेरित किया। यह मंदिर आज भी मेवाड़ के राजपरिवार की आराधना का केंद्र है और इतिहास की इस गाथा का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।

उदयपुर के राजवंशीय अभिलेखों और 18वीं शताब्दी के वंशावली चित्रों में बप्पा रावल को हरित ऋषि के समक्ष खड़े हुए दर्शाया गया है। यह चित्र न केवल उनके अध्यात्म और वीरता के संगम का प्रतीक है, बल्कि मेवाड़ की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का आधार भी है।

बप्पा रावल की गाथा केवल एक योद्धा की कहानी नहीं, बल्कि यह एक ऐसे बालक की कथा है जिसने विपत्ति से उठकर, धर्म, साहस और समर्पण के बल पर एक राज्य की स्थापना की। उनकी विरासत आज भी राजस्थान की मिट्टी में बसती है — जहां हर शिलाखंड उनके अदम्य साहस और शिवभक्ति की गवाही देता है।

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Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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