तिरंगे के सामने ये क्या करने लगीं टीना डाबी? क्या झंडा छोड़ कैमरे को दे रही थी सलामी?
गणतंत्र दिवस पर बाड़मेर जिला कलेक्टर टीना डाबी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। ध्वजारोहण के तुरंत बाद तिरंगे को सलामी देने के बजाय उनके 'गोल घूमने' और कैमरों की ओर देखने पर लोग सवाल उठा रहे हैं। क्या यह प्रोटोकॉल की चूक थी या महज एक संयोग? पढ़िए वायरल वीडियो की पूरी पड़ताल।

बाड़मेर। अपनी प्रशासनिक दक्षता से अधिक अपनी निजी जिंदगी, फैशन सेंस और सोशल मीडिया स्टारडम के लिए सुर्खियों में रहने वालीं देश की चर्चित आईएएस अधिकारी टीना डाबी एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार मामला किसी सरकारी योजना या स्थानांतरण का नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) से जुड़ा है। ध्वजारोहण के दौरान बाड़मेर जिला कलेक्टर टीना डाबी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है, जिसने इंटरनेट पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या "मैडम जिला कलेक्टर" राष्ट्रध्वज फहराने के बाद उसे सलामी देना भूल गईं?
क्या घटा उस 30 सेकंड के वीडियो में?
गणतंत्र दिवस के गरिमामयी अवसर पर बाड़मेर जिला मुख्यालय पर आयोजित मुख्य समारोह में टीना डाबी बतौर जिला कलेक्टर ध्वजारोहण करने पहुंची थीं। वातावरण देशभक्ति के जज्बे से सराबोर था, पुलिस की टुकड़ियां मुस्तैद थीं और राष्ट्रगान की धुन गूंजने ही वाली थी। वायरल वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि टीना डाबी ने पूरी गरिमा के साथ रस्सी खींचकर तिरंगा फहराया।
आमतौर पर, ध्वजारोहण की प्रक्रिया पूर्ण होते ही अधिकारी और जनप्रतिनिधि तत्काल सावधान की मुद्रा में आकर तिरंगे की ओर देखते हैं और उसे नमन या सलामी (Salute) देते हैं। किंतु, कैमरे में कैद हुआ नजारा परंपरा से हटकर था। झंडा फहराने के ठीक बाद, टीना डाबी ने तिरंगे की ओर देखने या सलामी देने के बजाय, अपनी ही जगह पर 360 डिग्री (गोल-गोल) घूमना शुरू कर दिया। इस दौरान उनका चेहरा ध्वज के सम्मान में ऊपर उठने के बजाय, नीचे खड़े लोगों, व्यवस्थाओं और संभवतः उन्हें कवर कर रहे मीडिया कैमरों की ओर था।
सोशल मीडिया पर छिड़ा 'प्रोटोकॉल बनाम कैमरा प्रेम' का युद्ध
जैसे ही यह वीडियो सार्वजनिक हुआ, नेटिजन्स ने आईएएस अधिकारी की इस हरकत को आड़े हाथों लिया। सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया है। बहुसंख्यक उपयोगकर्ताओं का मानना है कि एक जिला कलेक्टर के लिए ध्वजारोहण के तुरंत बाद पहली प्राथमिकता राष्ट्रध्वज को सम्मान देना होनी चाहिए, न कि भीड़ या कैमरों की ओर मुखातिब होना।
- एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा, "शायद मैडम यह सुनिश्चित कर रही थीं कि उनका वीडियो हर एंगल से सही बन रहा है या नहीं।"
- वहीं, एक अन्य टिप्पणी में कहा गया, "झंडे को सलामी तो बाद में भी दी जा सकती है, पहले कैमरों को सलामी जरूरी है।"
हालांकि, कुछ लोगों ने दबी जुबान में बचाव भी किया है। समर्थकों का तर्क है कि हो सकता है वह यह देख रही हों कि ध्वज से फूल ठीक से गिरे हैं या नहीं, या फिर वह चारों दिशाओं में मौजूद जनता का अभिवादन स्वीकार कर रही हों। लेकिन 'टाइमिंग' को लेकर सवाल बरकरार हैं।
क्या कहता है फ्लैग कोड और प्रोटोकॉल?
एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के रूप में टीना डाबी से प्रोटोकॉल के शत-प्रतिशत पालन की अपेक्षा की जाती है। 'फ्लैग कोड ऑफ इंडिया' और सामान्य प्रशासनिक प्रोटोकॉल के अनुसार:
- ध्वजारोहण के तत्काल बाद राष्ट्रगान शुरू होता है।
- ध्वज फहराने वाले व्यक्ति को ध्वज की ओर मुख करके सावधान की मुद्रा में खड़े होकर सलामी देनी होती है।
- इस गंभीर क्षण में अनावश्यक रूप से इधर-उधर देखना या घूमना प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना जा सकता है।
टीना डाबी युवाओं के लिए एक रोल मॉडल हैं और सोशल मीडिया पर उनकी विशाल फैन फॉलोइंग है। ऐसे में, सार्वजनिक मंचों पर किया गया उनका हर छोटा कृत्य खबर बन जाता है। अब यह 'गोल-गोल' घूमने वाला वाकया महज एक अनजाने में हुई चूक थी या फिर कैमरे के प्रति उनका सहज आकर्षण, यह तो जांच का विषय हो सकता है। लेकिन इतना तय है कि इस वीडियो ने गणतंत्र दिवस के जश्न के बीच एक अनावश्यक विवाद को हवा दे दी है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चाओं का बाजार गर्म है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
