भरतपुर।

उत्तर प्रदेश की यमुना नदी का पानी दो माह पहले डीग जिले से होते हुए भरतपुर जिले के कई गांवों तक पहुंचा था, जो अब किसानों की मुसीबत बन गया है। नगला हरचंद, तुहिया, सोगर और उबार जैसे गांवों के खेतों में आज भी पानी भरा हुआ है। नतीजतन खरीफ की फसल तो पहले ही नष्ट हो चुकी, अब रबी की बुवाई भी ठप पड़ी है। किसानों के अनुसार, लगातार अपीलों के बावजूद प्रशासनिक सहायता अब तक नहीं मिली है, जिससे ग्रामीणों ने अपने निजी खर्चे पर पानी निकासी के इंतजाम शुरू कर दिए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि मानसूनी बारिश और यमुना नदी से आया पानी अब तक पूरी तरह सूखा नहीं है। खेतों में लगातार जलभराव बना हुआ है, जिससे मिट्टी की नमी और संरचना दोनों प्रभावित हुई हैं। किसानों ने बताया कि अगर पानी की निकासी शीघ्र नहीं की गई, तो रबी की बुवाई संभव नहीं होगी, जिससे आने वाले दिनों में रोजी-रोटी का संकट गहराने की आशंका है।

किसानों ने बताया कि प्रशासन से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। मजबूरन गांवों के लोगों ने खुद ही पंप सेट, पाइप और मशीनें लगाकर पानी बाहर निकालने का कार्य शुरू किया है। यह प्रयास पूरी तरह निजी स्तर पर हो रहा है, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि कृषि केवल उनकी आजीविका नहीं, बल्कि अस्तित्व का प्रश्न है। “सीमा पर जवान और खेत में किसान सुरक्षित नहीं होंगे, तो देश की स्थिति बेहद गंभीर हो जाएगी,” एक किसान ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा।

प्रशासन की अनदेखी और प्रकृति की मार के बीच, भरतपुर के किसान अपने दम पर संघर्ष कर रहे हैं। यदि समय रहते पानी की निकासी नहीं हुई, तो न केवल इस सीजन की फसल बल्कि आने वाले मौसम की उम्मीदें भी डूब सकती हैं।

Pratahkal Bureau

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