जैसलमेर/जोधपुर। राजस्थान के जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर हुए भयावह स्लीपर बस अग्निकांड में 21 लोगों की मौत के बाद आखिरकार मंगलवार देर रात पहली एफआईआर दर्ज की गई है। इस दर्दनाक हादसे में जिंदा जले पत्रकार राजेंद्र चौहान के भाई चंदन सिंह चौहान ने बस मालिक और ड्राइवर के खिलाफ जैसलमेर के सदर थाने में मामला दर्ज कराया। पुलिस ने बताया कि यह एफआईआर हादसे के लगभग 24 घंटे बाद दर्ज की गई है और मामले की जांच अब तेजी से शुरू कर दी गई है।

इस भीषण हादसे में घायल 10 वर्षीय यूनुस ने बुधवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है। जोधपुर के महात्मा गांधी हॉस्पिटल में 14 घायलों का इलाज जारी है, जिनमें से 4 की हालत नाजुक बताई जा रही है और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि कई घायलों के शरीर का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा झुलस चुका है।

यह हादसा मंगलवार दोपहर करीब 3:30 बजे हुआ, जब जैसलमेर से जोधपुर जा रही एक प्राइवेट एसी स्लीपर बस अचानक आग की लपटों में घिर गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी तेज थी कि यात्रियों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला और 19 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक की मौत इलाज के दौरान अस्पताल में हुई।

पुलिस जांच में सामने आया है कि जिस बस में आग लगी, उसे कुछ दिन पहले ही परमिट जारी किया गया था। ट्रैवल कंपनी ने सोशल मीडिया पर इस बस का प्रमोशनल वीडियो भी जारी किया था, जिसमें इसे “लक्ज़री और पूरी तरह सुरक्षित” बताया गया था। अब जांच इस दिशा में भी बढ़ाई जा रही है कि कहीं बस की तकनीकी खामियों या अवैध सामग्री के कारण तो यह भयावह अग्निकांड नहीं हुआ।

बस में पटाखों की मौजूदगी पर शक, शॉर्ट सर्किट या एसी कम्प्रेशर फटने की आशंका

हादसे के कारणों को लेकर कई तरह के दावे सामने आ रहे हैं। प्रारंभिक जांच में बस में शॉर्ट सर्किट की संभावना जताई गई थी, जबकि बाद में एसी के कम्प्रेशर पाइप के फटने से आग लगने की बात कही गई। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि बस की डिग्गी पटाखों से भरी हुई थी, जिससे आग भड़क उठी और कुछ ही मिनटों में पूरे वाहन ने आग की लपटों को पकड़ लिया।

डीएनए सैंपल से हो रही शवों की पहचान

हादसे की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शवों की पहचान कर पाना बेहद मुश्किल हो गया है। जोधपुर और जैसलमेर के अस्पतालों में डीएनए सैंपल लेकर पहचान की प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि, देरी को लेकर परिजनों ने नाराजगी जताई है। इस पर अस्पताल अधीक्षक ने कहा कि वैरिफिकेशन में थोड़ा समय लग रहा है ताकि कोई गलती न हो और अगले 24 घंटे में प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

सरकार और नेताओं ने जताया शोक, जांच के आदेश जारी

राजस्थान सरकार के मंत्री के.के. बिश्नोई ने महात्मा गांधी अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना। उन्होंने बताया कि 50 प्रतिशत से अधिक झुलसे मरीजों के जीवन को गंभीर खतरा है और उनके इलाज के लिए विशेष मेडिकल टीम लगाई गई है। बिश्नोई ने कहा कि मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग को नए सुरक्षा नियम लागू करने और बसों में पटाखों के अवैध परिवहन पर रोक के निर्देश दे दिए हैं।

वहीं, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि “यह घटना बेहद दर्दनाक है, और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “यह हादसा बेहद दुखद है और इसकी तकनीकी जांच होनी चाहिए। बस हाल ही में खरीदी गई थी, इसलिए यह देखना जरूरी है कि आग लगने की वजह कोई तकनीकी खामी तो नहीं थी।”

सरकार ने संकेत दिया है कि इस तरह की सभी निजी स्लीपर बसों की तकनीकी जांच कराई जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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