बारां/सुल्तानपुर। सरस्वती विद्या मन्दिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, ज्ञान कुंज, विवेकानन्द नगर गुरुवार को एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित 36वीं राष्ट्रीय योगासन प्रतियोगिता का भव्य और विधिवत शुभारंभ हुआ। देशभर से आए खिलाड़ियों, आचार्यों और अतिथियों की उपस्थिति में कार्यक्रम का आरंभ सरस्वती वंदना के साथ हुआ, जिसने पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण स्थापित कर दिया।

प्रतियोगिता पर्यवेक्षक दुर्ग सिंह राजपुरोहित ने उद्घाटन कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्रधानाचार्य राकेश मणि त्रिपाठी ने मुख्य अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र और श्रीफल प्रदान कर किया। मुख्य वक्ता एवं विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के संगठन मंत्री हेमचंद ने अपने संबोधन में खेल और शिक्षा को एक-दूसरे के पूरक बताते हुए कहा कि श्रेष्ठ खिलाड़ी वही है, जो विनम्रता को अपने चरित्र में धारण करता है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती की स्थापना 1952 में गोरखपुर से इस उद्देश्य के साथ हुई थी कि पंचकोश आधारित शिक्षा के माध्यम से भारतीय संस्कृति, संस्कार और राष्ट्रभक्ति को पीढ़ियों तक पहुँचाया जा सके। हेमचंद ने संस्कारविहीन शक्ति की तुलना रावण से करते हुए कहा कि बिना मूल्यों के व्यक्ति विनाश का कारण बन सकता है।

मुख्य अतिथि डॉ. सलिल श्रीवास्तव, प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर, ने योग को भारतीय जीवन शैली का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि योग निरंतर और संयमित जीवन जीने की प्रेरणा देता है तथा मन और शरीर में अद्भुत संतुलन स्थापित करता है। प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष डॉ. वी.के. झा ने योग के माध्यम से व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास पर प्रकाश डाला। मंच से डॉ. पवन सिंह, भोलानाथ अग्रवाल, संयोजक राजेश, सह संयोजक मधुसूदन, जगदीश, होड़िल सिंह और अजीत सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

उद्घाटन सत्र में सभी खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता की शपथ ली। वरिष्ठ आचार्य महेश शुक्ल ने उद्घाटन मंत्र का उच्चारण किया। इसके बाद विद्यालय की छात्राओं ने भगवान राम की जीवन गाथा पर आधारित मनमोहक नृत्य-नाट्य प्रस्तुत कर दर्शकों से भरपूर सराहना प्राप्त की, जबकि शिशु मंदिर के नन्हे बच्चों ने रंगारंग प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में जीवंतता भर दी। संयोजक राजेश ने जानकारी दी कि प्रतियोगिता 30 नवंबर को संपन्न होगी।

कार्यक्रम के दौरान द्वारिका नाथ पाण्डेय, रंजना पाण्डेय, अनिल पाण्डेय, सरिता त्रिपाठी, रमेश मिश्र, विवेकानंद यादव, पूजा शुक्ला, शुभम सिंह, ज्योति उपाध्याय, रागिनी मिश्रा सहित देशभर से आए निर्णायक, संरक्षक आचार्य और प्रतिस्पर्धी उपस्थित रहे। समारोह ने न केवल योग की परंपरा को सशक्त किया, बल्कि राष्ट्रभर के युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अद्वितीय मंच भी प्रदान किया।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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