अखिल भारतीय अग्रवाल महिला जिला संगठन इकाई द्वारा आयोजित पांच दिवसीय तुलसी विवाह महोत्सव बुधवार को धार्मिक उल्लास और पारंपरिक वैभव के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का समापन दीनदयाल पार्क स्थित मंजू सुरेश बंसल के निवास पर तुलसी विवाह की विदाई रस्म के साथ हुआ, जहां श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

अध्यक्ष नीतू गुप्ता ने बताया कि पांचवें दिन के आयोजन की शुरुआत ग्यारस कथा से हुई। कथा श्रवण के बाद सजी-धजी महिलाएं पारंपरिक परिधानों में बासन और ठाकुरजी का विमान लेने के लिए खाकी बाबा की बगीची पहुंचीं। वहां देव दर्शन कर चाक पूजा सम्पन्न की गई। ढोल की थाप पर झूमती महिलाओं ने उत्साहपूर्वक 21 मंगल कलश अपने सिर पर धारण किए और भक्ति भाव से जुलूस में सम्मिलित हुईं।

महामंत्री मधु गोयनका ने बताया कि भगवान शालिग्राम की निकासी बैंडबाजों के साथ बड़े ही धूमधाम से निकाली गई। इस दौरान पूरा वातावरण "जय श्री विष्णु" और "तुलसी माता की जय" के जयकारों से गूंज उठा।

कोषाध्यक्ष बबली अग्रवाल और मीडिया प्रभारी मंजू गोयल ने जानकारी दी कि तुलसी को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है, जो भगवान विष्णु को अति प्रिय हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवउठनी एकादशी के दिन विष्णु भगवान निद्रा से जागकर सबसे पहले तुलसी की वंदना करते हैं। इसी से विवाह पर्वों का शुभारंभ माना जाता है। इसी परंपरा के तहत शालिग्राम भगवान का विवाह तुलसी माता से विधिवत संपन्न हुआ।

जुलूस में ढोल-नगाड़ों की गूंज, भगवान विष्णु का विमान और सिर पर रखे मंगल कलशों की पंक्तियों से शोभा बढ़ गई। विवाह स्थल पर बारात का पारंपरिक स्वागत किया गया। भगवान की 21 दीपकों से आरती उतारी गई और तिलक पूजन कर द्वाराचार की रस्म निभाई गई। तुलसी माता की भूमिका निभा रही मंजू बंसल ने कलश बंधन की विधि पूरी कर उन्हें ‘नेक’ अर्पित किया।

इसके बाद तोरण मारकर भगवान शालिग्राम और तुलसी माता का गृह प्रवेश कराया गया। मोसाले के रूप में नाना-नानी पक्ष से सभी महिलाओं को बधाई स्वरूप भेंट दी गई। अंत में तुलसी माता और शालिग्राम भगवान की वरमाला कराई गई और प्रसाद स्वरूप भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक भाग लिया।

धार्मिक आस्था और पारंपरिक संस्कारों से सजे इस आयोजन ने न केवल अग्रवाल समाज को एक सूत्र में बांधा, बल्कि समाज में भक्ति, एकता और संस्कृति की गूंज भी पुनः जीवंत कर दी।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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