खाटू श्याम मंदिर में बदली परंपरा; इस बसंत पंचमी नहीं बंटेंगे पीले कपड़े, मंदिर कमेटी की बड़ी घोषणा
खाटू श्याम मंदिर कमेटी ने बसंत पंचमी (23 जनवरी 2026) को लेकर महत्वपूर्ण गाइडलाइन जारी की है। कमेटी ने स्पष्ट किया है कि मंदिर में पीले वस्त्र (बाघा) बांटने की कोई परंपरा नहीं है और भक्तों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। बाबा श्याम के अंतः वस्त्र बदलने और विशेष पीत श्रृंगार से जुड़ी परंपराओं की पूरी जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें।

Khatu Shyam yellow cloth distribution reality on Basant Panchami : राजस्थान के सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री खाटू श्याम जी मंदिर में बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आने वाले इस पावन अवसर पर जहां बाबा श्याम का अलौकिक 'पीत श्रृंगार' किया जाता है, वहीं इस वर्ष मंदिर कमेटी ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए भक्तों के बीच व्याप्त भ्रम को दूर किया है। श्री श्याम मंदिर कमेटी ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि बसंत पंचमी के दिन मंदिर परिसर में पीले वस्त्र बांटने का कोई कार्यक्रम निर्धारित नहीं है।
परंपरा और भ्रामक दावों का सच :
खाटू श्याम मंदिर में बसंत पंचमी का दिन आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि साल में केवल इसी दिन बाबा श्याम के अंतः वस्त्र बदले जाते हैं। इसे लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर वस्त्र वितरण की खबरें प्रसारित हो रही थीं, जिस पर विराम लगाते हुए कमेटी ने कहा:
- आधिकारिक घोषणा: 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी के अवसर पर पीले वस्त्र बांटने की मंदिर में कोई परंपरा नहीं है।
- भक्तों को अपील: कमेटी ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे निराधार अफवाहों और भ्रामक पोस्ट पर विश्वास न करें।
- सुरक्षा और व्यवस्था: भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए किसी भी प्रकार के विशेष वितरण कार्यक्रम की योजना नहीं रखी गई है।
'बाघा' का महत्व और पीत श्रृंगार :
बाबा श्याम के भक्तों के लिए उनके द्वारा धारण किए गए वस्त्रों के प्रति अटूट श्रद्धा होती है। बाबा श्याम के गले से लिपटे रहने वाले इस विशेष केसरिया वस्त्र को ‘बाघा’ कहा जाता है। परंपरा के अनुसार, बाबा श्याम पूरे 365 दिन इस अंतः वस्त्र को धारण करते हैं और केवल बसंत पंचमी के दिन ही इसे उतारकर नए पीले वस्त्र पहनाए जाते हैं। बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक यह पीत श्रृंगार भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देता है, क्योंकि पीला रंग बाबा के प्रति श्रद्धा और भक्ति की पराकाष्ठा का प्रतीक माना जाता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
